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समास के बारे में...

‘समास’ अरसे बाद प्रकाशित होना शरू हुआ । पिछले चार अंकों का सम्पादन तीन सम्पादक उदयन वाजपेयी, अशोक वाजपेयी और मदन सोनी करते थे। समास कृतियों में गहन पारम्परिक अन्तर्दृष्टि और समकालीन सजगता एक साथ बेहद उज्ज्वल भाषा में चरितार्थ करने का उद्देश्य रखता है। यह उन जैसे कवियों, साहित्यकारों की उपस्थिति है जो हमें तमाम ओर से विष बुझे परशु की तरह भेदती तरह-तरह की जानकारियों के बीच अपनी ओर बढ़ी हुई बाँह की तरह अनुभव होती है। पिछले कई दशकों के कोलाहाल के कारण कवियों, साहित्यकारों की कृतियों का वैसा पठन-पाठन नहीं हो सका जैसा उनके जैसी श्रेष्ठ कृतियों का किसी भी आत्मसजग सांस्कृतिक परिवेश में हुआ करता है। हमें इस बात पर आश्चर्यचकित होना चाहिए कि हमारी साहित्यिक संस्कृति पर बेजान और निष्फल हो गयी विचारधाराओं की ऐसी काली छाया पड़ी हुई है कि हम अपने अनेक श्रेष्ठ कृतिकारों को रेखांकित करने में संकोच करते हैं। ‘समास’ के पाठकों को यह जानना निश्चय ही रूचिकर है कि ‘समास’ साहित्य और कलाओं पर एकाग्रता रखता है।

सम्पादक

उदयन वाजपेयी

कवि, कथाकार, निबन्धकार और अनुवादक उदयन वाजपेयी मणि कौल के शिष्य हैं। उनके दो कविता संग्रह (‘कुछ वाक्य’ और ‘पागल गणितज्ञ की कविताएँ’), तीन कहानी संग्रह (‘सुदेशना’, ‘दूर देश की गन्ध’ और ‘सातवाँ बटन’), दो निबन्ध संग्रह (‘चरखे पर बढ़त’ और ‘पतझर के पाँव की मेंहदी’), आदिवासी परधान कला पर ‘जनगढ़ कलम’ आदि कई पुस्तकें प्रकाशित हैं। इनकी कविताओं के ओड़िया, तमिल, बांग्ला, फ्रांसीसी, पोलिश, स्वीडिश आदि कई भाषाओं में अनुवाद प्रकाशित हैं। इनकी दो पुस्तकें ओड़िया अनुवाद में और एक फ्राँसीसी अनुवाद में प्रकाशित है। कुमार शहानी की फिल्म ‘चार अध्याय’ और ‘विरह भरयो घर आँगन कोने’ के लिए लेखन किया है । भवभूति के नाटक ‘उत्तररामचरितम्’ की रंग निर्देशक कावालम नारायण पणिक्कर के लिए हिन्दी में पुनर्रचना । कावालम नारायण पणिक्कर के रंगकर्म पर आधारित पुस्तक ‘थियेटर ऑफ रस’ का सम्पादन। इन दिनों साहित्य, कला और सभ्यता की पत्रिका ‘समास’ का सम्पादन कर रहे हैं।