Edited by Hariday Kant Dewan, Rama Kant Agnihotri, Arun Chaturvedi, Ved Dan Sudhir, Rajni Dwivedi

एच.के. दीवान अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर हैं। इनका प्रमुख कार्य विश्वविद्यालय के उच्च शिक्षा कार्यक्रमों को दो भारतीय भाषाओं, हिन्दी व कन्नड़ में शुरू करने व देश में हिन्दी व कन्नड़ में विमर्श व चिन्तन शुरू करने के प्रयास में योगदान देना है। इन्होंने एकलव्य व विद्या भवन के साथ कई वर्षों तक कार्य किया है और अभी भी जुड़े हैं। वे देश में स्कूल, शिक्षक और उच्च शिक्षा में बदलाव के प्रयासों से 35 वर्ष से जुड़े हैं।/ रमा कान्त अग्निहोत्री दिल्ली विश्वविद्यालय से भाषाशास्त्र के प्रोफ़ेसर के पद से सेवानिवृत्त, वर्तमान में विद्या भवन सोसायटी, उदयपुर (राज.) में कार्यरत हैं। प्रायोगिक भाषाशास्त्र, शब्द-संरचना तथा सामाजिक भाषाशास्त्र जैसे विषयों को लम्बे समय से पढ़ाते रहे हैं और उनके बारे में विस्तृत लेखन किया है। अरुण चतुर्वेदी मोहन लाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर में राजनीतिशास्त्र के भूतपूर्व आचार्य। वर्तमान में विद्या भवन से जुड़े हैं। अन्तरराष्ट्रीय राजनीति, भारतीय विदेशनीति, अन्तरराष्ट्रीय कानून, मानव अधिकार और तृणमूल स्तर पर नियमित लेखन।/ वेददान सुधीर विद्या भवन इन्स्टीट्यूट में 35 वर्ष से राजनीतिशास्त्र का अध्यापन तथा इसी संस्थान में निदेशक। ‘भारतीय संविधान के चर्चित प्रसंग’, ‘भारतीय संविधान और राजनीति’, ‘पुस्तकों का लेखन’, तथा ‘भारत में पंचायती राज’, और ‘21वीं शताब्दी के सरोकार’, पुस्तकों का सम्पादन।/ रजनी द्विवेदी शिक्षक प्रशिक्षण, पाठ्यचर्या व पाठ्यपुस्तक निर्माण, पत्र-पत्रिकाओं हेतु लेखन व सम्पादन, शोध इत्यादि कार्य से जुड़ी रही हैं। शिक्षकों व बच्चों के लिए सीखने-सिखाने व भाषा सम्बन्धित सामग्री निर्माण में रुचि।

Edited by Hariday Kant Dewan, Rama Kant Agnihotri, Arun Chaturvedi, Ved Dan Sudhir, Rajni Dwivedi

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