Kripashankar Singh, Chaturbujh Sahay

कृपाशंकर सिंह शिक्षा : लखनऊ विश्वविद्यालय, भाषा विज्ञान विद्यापीठ, आगरा विश्वविद्यालय तथा पी-एच. डी. दिल्ली विश्वविद्यालय। शोध और अध्यापनः शिकागो विश्वविद्यालय (निहाली जनजाति की भाषा), भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान शिमला में शोध तथा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय और दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्यापन। आजकल पूर्णकालिक लेखन। पुस्तकें : ऋग्वेद, हड़प्पा सभ्यता और सांस्कृतिक निरन्तरता, हिन्दी, उर्दू हिन्दुस्तानी, हिन्दू मुस्लिम साम्प्रदायिकर्ता और अंग्रेजी राज (1800-1947), हायरार्किकल स्ट्रक्चर आव भोजपुरी, भाषाविज्ञान और भोजपुरी, लेक्सिकल बारोइंग इन निहाली फ्राम हिन्दी एण्ड मराठी, आधुनिक आलोचना बनाम शैली विज्ञान, कविता के समानान्तर, रीडिंग्स इन हिन्दी उर्दू लिंग्वीटैक्स, व्यावहारिक आलोचना (सह-लेखन), इतिहास का सच और हिन्दी-उर्दू तथा दक्खिनी हिन्दी (प्रेस में) आदि पुस्तकों के अलावा बहुत से शोध-पत्र प्रकाशित। /चतुर्भुज सहाय शिक्षा : एम.ए., पी-एच.डी. बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय। शोध और अध्ययन : केन्द्रीय हिन्दी संस्थान आगरा में लगभग चालीस वर्षों का शोध तथा अध्यापन का अनुभव । प्रोफेसर पद से अवकाश प्राप्त। पुस्तकें तथा शोध-पत्रः हिन्दी के अव्यय वाक्यांश, हिन्दी पद विज्ञान, हिन्दी क्रिया-काल, पक्ष और वृत्ति (संपादन) के अलावा अनेक शोध पत्र प्रकाशित। केन्द्रीय हिन्दी संस्थान आगरा की शोध पत्रिका 'गवेषणा' का कई वर्षों तक संपादन।

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Books by Kripashankar Singh, Chaturbujh Sahay