Mughal Mahmood, Zahara Rai Edited by Sara Rai

मुग़ल महमूद ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से 1952 में फ़ारसी में एम.ए. किया। उनकी कहानियाँ पचास और साठ के दशक में अधिकतर 'कहानी' में छपी। उनकी लगभग सभी कहानियाँ नवाब-की-ड्योढ़ी बनारस, यानी अपनी खानदानी हवेली में स्थित हैं। इसी हवेली के हाते में उन्होंने 1966 में बाल भारती स्कूल खोला और जीवन भर बच्चों को नाट्य और संगीत सहित सभी विषयों में उच्च शिक्षा दी। उनके द्वारा लिखी बच्चों के लिए कहानियों का संचयन 'सुनहले पंख' सरस्वती प्रेस से प्रकाशित हुआ।/ ज़हरा राय हिन्दी की कथाकार थीं। उनकी रचनाएँ 1957-77 के बीच 'कहानी', 'कल्पना', 'नयी कहानियाँ' 'सारिका' जैसी पत्रिकाओं में बराबर प्रकाशित हुई। बागबानी पर उनके लेख सिलसिलेवार 'धर्मयुग' में छपे। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संगीत में एम.ए. किया। अव्यावसायिक तौर पर वह जीवनभर हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीतकार रहीं, जिन्होंने आफ़ताब-ए-मौसीकी उस्ताद फैयाज़ ख़ाँ और आचार्य बृहस्पति से भी शिक्षा ली। 1978 में उन्होंने बच्चों के लिए मुंशी प्रेमचन्द मेमोरियल स्कूल की स्थापना की और 1993 में अपनी मृत्यु तक स्कूल की प्रधानाचार्या रहीं।/ सारा राय समकालीन हिन्दी कथाकार हैं। वे हिन्दी, अंग्रेज़ी और उर्दू की अनुवादक हैं। उनके तीन कथा संग्रह (अबाबील की उड़ान, 1997, बियाबान में 2005, भूलभुलैया और अन्य कहानियाँ, 2015) प्रकाशित हैं और एक उपन्यास (चीलवाली कोठी, 2010 और 2015)। अरविन्द कृष्ण महरोत्रा के साथ किये गये विनोद कुमार शुक्ल की कहानियों के अनुवाद, ब्लू इज़ लाइक ब्लू (2019) को बंगलोर लिटरेरी फेस्टिवल का ‘अट्टा गलट्टा' पुरस्कार मिला है। उनकी अन्य अनूदित और सम्पादित पुस्तकों में शामिल हैं प्रेमचन्द की कज़ाकी एंड अदर मार्वेलस टेल्स (2013) हिन्दी हैंडपिक्ड फ़िक्शंस (2003), द गोल्डेन वेस्ट चेनः मॉडर्न हिन्दी शॉर्ट स्टोरीज़, (1990)। 2019 में योहाना हान द्वारा किये गये उनकी कहानियों के जर्मन अनुवाद इम लैबिरिन्थ को जर्मनी का फ्राइड्रिश रुकर्ट पुरस्कार मिला है। ज़हरा राय उनकी माँ थीं और मुग़ल महमूद उनकी मौसी। सारा राय इलाहाबाद में रहती हैं। पता: 12/6 ड्रमण्ड रोड, इलाहाबाद 211 001 ई-मेल : sararai11@gmail.com

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