Dr. Surendra Gambhir

लेखक डॉ. सुरेन्द्र गम्भीर अमरीका में यूनिवर्सिटी ऑफ़ पेन्सिल्वेनिया में पिछले अनेक वर्षों से अध्यापन कार्य में रत हैं । आप यूनिवर्सिटी ऑफ़ विस्कांसिन और कारनेल यूनिवर्सिटी में भी पढा चके हैं। यनिवर्सिटी ऑफ पेन्सिल्वेनिया में ही आपने भाषा-विज्ञान का प्रशिक्षण प्राप्त करके वहाँ से पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की थी। समाज में भाषा के स्थान को लेकर आपका गहरा चिन्तन रहा है। भारत में हिन्दी, हिन्दी-अंग्रेजी सम्बन्ध और भारत से बाहर हिन्दी और भोजपरी के विषय में आपने बहुत कुछ लिखा है। अनेक वर्षों से आप शोध-कार्य में व्यस्त हैं। आपने दक्षिणी अमरीका के देश गयाना, सूरीनाम, कैरिबियन समुद्र के बीच स्थित द्वीप त्रिनीदाद-तोबैगो, हिन्द महासागर में स्थित मॉरीशस और अमरीका आदि देशों में जगह-जगह घूम कर भारतीय मूल के निवासियों से बातचीत और शोध के लिए अनेक प्रकार की सामग्री एकत्र की है। भारत में भी बिहार और उत्तर प्रदेश के अनेक गाँवों में आपने कन्धे पर टेपरिकार्डर लटकाए लोगों की भाषा और भाषा के बारे में उनके विचारों को उनकी भाषा के नमूनों को टेपबद्ध किया। इस समग्र सामग्री का समय-समय पर विश्लेषण अनेक लेखों और पुस्तकों के रूप में सामने आता रहा है। उसी शृंखला में यह पुस्तक भी प्रस्तुत है।

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