Saroj Vashishth

सरोज वशिष्ठ आकाशवाणी दिल्ली से 1989 में उद्घोषिका, अनुवादिका के पद से 29 वर्ष की सेवा के बाद सेवानिवृत्त लेकिन रेडियो शिमला और दिल्ली में अभी भी सक्रिय भागीदार। 1960 से निरंतर नाटक समीक्षक। लोगोस नामक अनुवाद ब्यूरो का (अंग्रेजी, हिंदी, फ्रैंच, जापानी) संचालन। सम्मान : साहित्य और रंगकर्म के माध्यम से कैदियों के साथ साहित्य के माध्यम से किए गए काम के लिए 16 सितम्बर, 1965 को विजया फाउंडेशन अवार्ड; 4 अप्रैल, 1997 को रेड एंड व्हाइट बहादुरी अवार्ड; 10 अप्रैल, 1997 को भगवान महावीर अवार्ड, 1 दिसम्बर, 1999 को हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल वी.एस. रमादेवी द्वारा सम्मानित; 2000 में संस्कार भारती शिमला इकाई द्वारा साहित्य सेवा के लिए सम्मानित; 4 मार्च 2001 को हिमाचल के मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल द्वारा हिमात्कर्ष राष्ट्रीय एकात्मकता पुरस्कार, समाज सेवा कार्यक्षेत्र में अद्वितीय कार्य श्रेष्ठता के लिए उना में सम्मानित; जून, 2001 में शिमला इन्नर व्हील द्वारा सम्मानित। 1996 में हिमाचल के कारावासों में निरन्तर सेवा के लिए भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वारा इंडिया विजय फाउन्डेशन पुरस्कार से सम्मानि-8 सितंबर, 20071 दो कहानी संग्रह - अपने-अपने कारावास 1982. जिन्दानी 2008 (अभिव्यंजना प्रकाशन), तिहाड़ जेल में ऐसे जैसे कुछ हुआ ही नहीं - एक अनुभव, 1997 और मोर्चा दर मोर्चा - किरण बेदी के विचारों पर आधारित संस्मरण 1981 (वाणी प्रकाशन), 1966 से 2008 तक हिमाचली जेलों में किए काम का लेखा जोखा "ऐराफ"। सदस्य : सिद्धार्थ महिला कल्याण संस्था व दिल्ली कलाकर्म की संस्थापक और गत पन्द्रह वर्षों से महासचिव के अलावा ऑल इंडिया किचन गार्डन और शिमला की सजैज़ संस्था, नशामुक्ति केन्द्र दोस्त, एज केयर इंडिया और बोलन्टरी हैल्थ एसोसिएशन की आजीवन सदस्य। हिमाचल प्रदेश विज्ञापन, तकनीक और पर्यावरण परिषद में रंग कार्यशालाओं की गत चौदह वर्षों से आयोजक। साथ ही समय-समय पर इनके लिए अनुवाद कार्य भी।

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