आधुनिक हिन्दी साहित्य: विविध आयाम

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5072-016-5

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मूल्य:रु350/-

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नयी पीढ़ी के लिए, स्वतन्त्रता का अर्थ था, तमाम शोषणों से मुकित और ताकतवर एवं वैभवशाली राष्ट्र के रूप में भारतवर्ष की प्रतिष्ठा। पर स्वतन्त्रता-प्राप्ति के साथ देष-विभाजन से उद्भूत भीषण समस्याओं से जूझना हमारा अभिशाप बना; नियति बनी। नगरीय एवं महानगरीय समस्याएँ भी असन्तोषजनक आर्थिक स्थिति एवं बढ़ती जनसंख्या से जुड़ी हुई हैं। परिणामतः परम्परागत आचार-व्यवहार तो बदल रहे हैं, नैतिक मानदंड तथा लोगों के रीति-रिवाज भी बदल रहे हैं। नये दशक में समाज के विभिनन वर्गों में तनाव पहले की अपेक्षा बहुत बढ़ गया और राजनीति का क्षेत्र अनिश्चितता का केन्द्र बना रहा। इन सबका भुक्त-भोगी नवयुवक इतिहास का सबसे बड़ा मूर्ति-भंजक रहा है। मूलतः वह आदर्शवादी है, पर जीवन के किसी भी पहलू पर इस आदर्श परिस्थिति की अनुपस्थिति से वह सहज रूप से दिग्भ्रमित होने लगा है। आज का युग संक्रान्तिाल-सा लगता है क्योंकि सामाजिक जीवन में जो भी कटुता है, अशान्ति और संघर्ष है, वे एक नये युग की प्रसव-पीड़ा के रूप में है। यह समय ऐसा है जिसमें मानव-जीवन के तमाम पहलू बदलते जा रहे हैं जिनके बारे में निश्चित रूप से कहा नहीं जा सकता। आजाद भारत के समकालीन परिवेश के सन्दर्भ में उभरे नयी पीढ़ी के लेखक अभावों, संघातों, संघर्षों एवं गहराते जीवन-मूल्यों के विघटन के गुजरते हुए जीवन की तह में जाकर उसके मर्म को छूने के लिए प्रयत्नशील हैं। समकालीन हिन्दी साहित्य सन्दर्भो का न होकर सम्बन्धों और स्थितियों को ग्रहण करता जा रहा है। जीवन के भिन्न-भिन्न स्तरों को, भिन्न-भिन्न आयामों को, भिन्न-भिन्न परतों को उघाड़ने की दिशा में समकालीन हिन्दी साहित्य अग्रसर है जिससे भविष्य में बहुत आशा है।

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About the writer

DR. V.K. ABDUL JALEEL

DR. V.K. ABDUL JALEEL जन्मः 24 अप्रैल 1950, केरल के पष्चिम कडूंगल्लूर (आलुवा) गाँव में। षिक्षा: कालिकट विष्वविद्यालय से एम.ए. की उपाधि प्रथम स्थान के साथ तथा पीएच.डी. की उपाधि। प्रकाषन: अनेक पत्र-पत्रिकाओं में आलोचनात्मक लेख प्रकाषित। सम्प्रति: केरल के विभिन्न स्नातक एवं स्नातकोत्तर कॉलेजों में अध्यापन का लम्बा अनुभव। कालिकट विष्वविद्यालय के स्नातकोत्तर बोर्ड का सदस्य। श्री षंकराचार्य संस्कृत विष्वविद्यालय के अकादमिक कौंसिल का सदस्य। श्री षंकराचार्य संस्कृत विष्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में रीडर एवं अध्यक्ष।

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