हंस की लम्बी कहानियाँ (2खंड सेट)

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ISBN:978-93-5000-816-4

लेखक:राजेन्द्र यादव

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मूल्य:रु1500/-

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हंस : लम्बी कहानियाँ' के सन्दर्भ में प्रख्यात कथाकार राजेन्द्र यादव के विचार "जिसे हम कहानी कहते हैं, अंग्रेजी में वही' शॉर्ट स्टोरी' है, लेकिन शॉर्ट स्टोरी वह नहीं जिसे हिन्दी के कथा-साहित्य में हम लघुकथा कहते हैं । उपन्यास की तुलना में कहानी का आगमन हिन्दी में खासा देर से हुआ । कहानी का पदार्पण तब तक नहीं हुआ था जब तक पत्र-पत्रिकाओं का छपना शुरू नहीं हो गया । कहानी का जन्म और प्रसार पत्रिकाओं के प्रकाशन की शुरुआत के साथ जुड़ा है और पत्रिकाओं में उपलब्ध स्थान की सीमाओं ने कहानी के विस्तार को सीमित और परिभाषित किया है । 'हंस' के पहले अंक से ही लम्बी कहानी को एक नियमित स्थायी स्तम्भ की तरह शामिल करने का मंतव्य यही था कि कहानी अपनी गुंजाइशों को चरम तक पहुँचा पाए क्योंकि बुनियादी कहानी का सरल विधान वर्णन पर आधारित होता है जबकि कहानी के लम्बे रूपों में नाटकीय संरचना के बीच तत्त्व दिखाई देते हैं । लगभग दस वर्ष तक चलने वाले इस स्तम्भ में लगभग सवा सौ लम्बी लम्बी कहानियाँ छपीं । कभी द्रुत में सामाजिक सरोकारों, दृष्टिकोण की बहुलताओं और टकराहटों को सरपट नापती हुई, कभी विलम्बित में धीरे-धीरे खुलती, फैलती अपने कथ्य के कोनों अँतरों को भरती लास्य में आलस और शिथिल । लम्बी कहानी के सबल और समर्थ कथारूप के तरह स्थापित हो चुकी है, यह आज की युवा रचनाशीलता को देखते स्वयं प्रमाणित है ।"

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About the writer

ED. RAJENDRA YADAV

ED. RAJENDRA YADAV राजेन्द्र यादव जन्म : 28 अगस्त, 1929 शिक्षा : एम.ए. (आगरा)। प्रथम रचना : प्रतिहिंसा ('चांद' के भूतपूर्व सम्पादक श्री रामरखसिंह सहगल के मासिक 'कर्मयोगी' में) 1947 में। प्रकाशित रचनाएँ : सारा आकाश, उखड़े हुए लोग, शह और मात, एक इंच मुस्कान (मन्नू भंडारी के साथ), कुलटा, अनदेखे अनजाने पुल, मंत्रविद्ध (उपन्यास) देवताओं की मूर्तियाँ, खेल-खिलौने, जहाँ लक्ष्मी कैद है, छोटे-छोटे ताजमहल, किनारे से किनारे तक, टूटना, ढोल और अपने पार, वहाँ तक पहुँचने की दौड़, श्रेष्ठ कहानियाँ, प्रिय कहानियाँ, प्रतिनिधि कहानियाँ, प्रेम कहानियाँ, दस प्रतिनिधि कहानियाँ और चौखटे तोड़ते त्रिकोण। (अब तक की तमाम कहानियाँ पड़ाव-1, पड़ाव-2 और 'यहाँ तक' शीर्षक तीन जिल्दों में संकलित) (कहानी संग्रह), आवाज़ तेरी है (कविता संग्रह) कहानी : स्वरूप और संवेदना, उपन्यास : स्वरूप और संवेदना, कहानी : अनुभव और अभिव्यक्ति, औरों के बहाने, अठारह उपन्यास, कांटे की बात शृंखला (निबन्ध संग्रह)। 'सम्पादन : नये साहित्यकार पुस्तकमाला में मोहन राकेश, कमलेश्वर, राजेन्द्र यादव, फणीश्वरनाथ रेणु तथा मन्नू भंडारी की चुनी हुई कहानियाँ। एक दुनिया : समानान्तर, कथा-यात्रा, कथा-दशक, आत्मतर्पण और काली सुखियाँ (अफ्रीकी कहानियाँ)। 'अनुवाद : हमारे युग का एक नायक : लर्मेल्तोव, प्रथम प्रेम, 'वसंत प्लावन : तुर्गनेव, टक्कर : ऐन्तोन चेखव, संत 'सर्गीयस : टालस्टॉय, एक महुआ : एक मोती : स्टाइन बैक, 'अजनबी : अलबेयर कामू (छहों उपन्यास कथा-शिखर-1,2 शीर्षक से दो जिल्दों में संकलित)। निधन : 28 अक्टूबर 2013

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