मोमिजि के रंग

Original Book/Language: Collection of Poems/ Japanese

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5000-196-7

लेखक:

अनुवाद:मोमिजि क्या है? जापानी भाषा में उस प्राकृतिक संवृत्ति को मोमिजि कहते हैं जिसके तहत पेड़ों के पत्ते लाल, पीले या भूरे रंग में रंग जाते हैं। विशेषकर पर्णपाती वृक्षों में पत्तों के झड़ने के पूर्व ही यह संवृत्ति दिखाई देती है। जापान में शरद ऋतु के समय, यानी अक्टूबर-नवंबर के आसपास, मोमिजि होता है। एक विद्वान ने इसका हिन्दी अनुवाद 'शरदरंजन' किया है। शरदरंजित पत्तों को भी मोमिजि कहते हैं। कंचेली की जाति का एक पर्णपाती वृक्ष काएदे, जो अंग्रेजी मेपल में तथा लैटिन में एसर पल्माटम कहा जाता है, के पत्ते शरद में एकदम लाल हो जाते हैं और बहुत सुंदर लगते हैं, इसलिए मोमिजिशब्द कई अवसरों पर विशेष रूप से इस वृक्ष के पत्तों का ही संकेत करता है।

Pages:258

मूल्य:रु400/-

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Rs.400/-

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Collection of Poems/ Japanese

Additional Information

मोमिजि क्या है? जापानी भाषा में उस प्राकृतिक संवृत्ति को मोमिजि कहते हैं जिसके तहत पेड़ों के पत्ते लाल, पीले या भूरे रंग में रंग जाते हैं। विशेषकर पर्णपाती वृक्षों में पत्तों के झड़ने के पूर्व ही यह संवृत्ति दिखाई देती है। जापान में शरद ऋतु के समय, यानी अक्टूबर-नवंबर के आसपास, मोमिजि होता है। एक विद्वान ने इसका हिन्दी अनुवाद 'शरदरंजन' किया है। शरदरंजित पत्तों को भी मोमिजि कहते हैं। कंचेली की जाति का एक पर्णपाती वृक्ष काएदे, जो अंग्रेजी मेपल में तथा लैटिन में एसर पल्माटम कहा जाता है, के पत्ते शरद में एकदम लाल हो जाते हैं और बहुत सुंदर लगते हैं, इसलिए मोमिजिशब्द कई अवसरों पर विशेष रूप से इस वृक्ष के पत्तों का ही संकेत करता है।

About the writer

RAJ BUDDHIRAJA, TOMOKA KIKUCHI, YOSIO TAKAKURA

RAJ BUDDHIRAJA, TOMOKA KIKUCHI, YOSIO TAKAKURA डॉ. राज बुद्धिराजा : 16 मार्च 1937 को लाहौर में जन्म। विख्यात शिक्षाविद एवं बहभाषाविद, साहित्यकार समीक्षा, कविता, कहानी, उपन्यास, संस्मरण, यात्रा वृत्तांत. जीवनी और स्तंभ लेखन आदि अनेक विधाओं में कार्य। अब तक 66 पुस्तकें प्रकाशित। भारत-जापान सांस्कृतिक परिषद की अध्यक्ष और भारत-जापान के सांस्कृतिक संबंध के विकास में अभूतपूर्व योगदान । जापान नरेश द्वारा सर्वोच्च सम्मान 'जुइहोशो' प्राप्त। / डॉ. तोमोको किकुचि : एशिया अफ्रीका भाषा विद्यापीठ, तोक्यो और केंद्रीय हिन्दी संस्थान, आगरा में हिन्दी का प्रशिक्षण। 1996 में महारानी कालेज, राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.ए., जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से एम.ए. और एम.फिल. | करने के पश्चात 2005 में पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की। प्रकाशन : 'महादेवी वर्मा विश्व दृष्टि’ की। / /योशिओ तकाकुरा : 25 नवंबर 1978 को जापान के तोयोहाशी शहर में जन्म। 2001 में तोक्यो विश्वविद्यालय से बी.ए. (भाषाविज्ञान) किया। सन 2001 से 2003 में केंद्रीय हिन्दी संस्थान, दिल्ली में हिन्दी का प्रशिक्षण। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से एम. ए. और एम.फिल. करने के बाद अब पीएच.डी. के लिए शोधरत। प्रकाशन : ‘जापान-भारत के लोरीगीत’ (2008)।

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