रासायन में क्रान्ति

Format:Hard Bound

ISBN:81-88716-13-8

लेखक:

Pages:140

मूल्य:रु300/-

Stock:Out of Stock

Rs.300/-

Details

अगर कोई रसायन की सारी बातें लिखनी शुरू कर दे और इसके सारे पहलुओं तथा वैभव का वर्णन करना चाहे, तो एक उच्चतम विकसित देश के कागज का भंडार कम पड़ जायेगा। भाग्यवश अभी तक किसी ने ऐसी बात सोची रसायन खुद ही मानव के ज्ञान का इतना लुभावना क्षेत्र है कि एक नीरस भावहीन तरीके से इसका वर्णन करना असम्भव है। इसकी भाषा साधारण तथा स्पष्ट होनी चाहिए, विशेष रूप से जब किताब सामान्य जन के लिए लिखी जा रही हो। परन्तु हद से ज्यादा ”सरसता“ से झुँझलाहट भी हो सकती है...मुख्य बात यह है कि किस चीज का वर्णन किया जाये? रसायन की कोई निश्चित सीमायें नहीं हैं, इसके क्षितिज लगातार फैल रहे हैं परन्तु लेखकों को पुस्तक के आकार का, उसकी सीमाओं का खयाल रखना है।

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Prof. Chandrashekhar Ambashak

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