एक गिलास दुपहरी

Format:Hard Bound

ISBN:9789352290390

लेखक:शिव कुमार

Pages:124


मूल्य : रु. 225/-

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Rs. 225/-

Details

एक गिलास दुपहरी

Additional Information

यह कहा जा रहा है कि आज ऐसी कविता सम्भव नहीं जिसमें एक प्रेमी खिड़की पर बैठी स्त्री के गिरे हुए केश देख कर मोहित हो जाए। समकालीन कविता की पैरवी करने वाले प्रेम को मानव जीवन का अनिवार्य अंग तो मानते हैं किन्तु उनके अनुसार समकालीन परिस्थितियों ने वैश्विकता के कारण आये बाज़ारवाद द्वारा प्रेम जैसी बहुमूल्य संवेदना को बाज़ार की वस्तु बना दिया है और प्रेम का अभाव मानव के बिखराव का सबसे बड़ा कारण है। ऐसे कवि वर्ग की भाव धारा को, जिनकी रचनाओं में राजनीतिक व्यवस्था और अपने सामाजिक ढाँचे को लेकर गहरा असन्तोष है, प्रगतिशील-यथार्थवादी माना जा रहा है। दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है कि इन कवियों ने समय और समाज में चल रहे राजनैतिक और सांस्कृतिक पतन के विरुद्ध एक सशक्त मोर्चा खोल रखा है। इन कवियों के अनुसार वर्तमान समय में सहजतापूर्वक रह कर रचनाकार्य करना कठिन है। इनका मानना है कि ये अपने समय की कठिनाइयों और भयाक्रान्त स्थितियों से लोहा ले रहे हैं। इनकी कविता ऐसे लोगों के जीवन और भावों पर ध्यान केन्द्रित करती है जिन्होंने हमेशा-हमेशा से नंगे पाँव घूमते हुए इस धरती की पवित्रता का मान रखा है। इनकी कविताओं में किसी घोषणा-पत्र की वाचालता नहीं, बल्कि मनुष्य के पतन का आत्मधिक्कार समाया हुआ है। इनके दृष्टिकोण, सोच और संवेदना में एक दृढ़ता, गहराई, व्यापकता परिलक्षित होती है।

About the writer

KUMAR SHIV

KUMAR SHIV चम्बल नदी के तट पर बसे कोटा नगर में 11 अक्टूबर 1946 को जन्म। 1967 में शिव कुमार शर्मा एडवोकेट के रूप में वकालत प्रारम्भ की। साथ ही साथ एम.ए. (हिन्दी) की कक्षा में प्रवेश लिया। इन्हीं दिनों एक सहपाठी ने कुमार शिव नाम से सम्बोधित किया और यही नाम साहित्यिक क्षेत्र में सुपरिचित होता चला गया। डॉ. धर्मवीर भारती ने 'धर्मयुग' में कई गीत प्रकाशित किये। डॉ. शम्भुनाथ सिंह ने 'नवगीत दशक-2Ó में प्रथम गीत-कवि के रूप में सम्मिलित किया। निम्न चार काव्य संग्रह प्रकाशित हुए— शंख-रेत के चेहरे (गीत) पंख धूप के (ग़ज़लें व दोहे) हिलते हाथ दरख़्तों के (ग़ज़लें) आईना ज़मीर का देखा (ग़ज़लें) 6 अप्रैल 1996 को राजस्थान उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। कुमार शिव नाम पृष्ठभूमि में चला गया और नया नाम 'जस्टिस शिव कुमार शर्मा' प्रचलन में आ गया। 10 अक्टूबर 2008 को सेवानिवृत्त होकर सुप्रीम कोर्ट में सीनियर एडवोकेट के रूप में नामांकित हुए। फिर 19वें भारतीय विधि आयोग के सदस्य बने।

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