लोक और शास्त्र अन्वय और समन्वय

Format:Hard Bound

ISBN:9789350729960

लेखक:विद्यानिवास मिश्र

Pages:248

मूल्य:रु450/-

Stock:Out of Stock

Rs.450/-

Details

No Details Available

Additional Information

प्रत्येक समाज में स्तर भेद होते हैं और वैचारिक अभिव्यक्ति रूपों की बहुलता होती है। इस प्रकार की विवधता संस्कृति को स्मृध्द करती है। जैवविविधता की ही तरह वैचारिक तथा ज्ञान परंपराओं की विविधता भी हमें सम्पन्न बनती है। पुस्तक में शामिल आलेखों का प्रतिपाद वैसे केंद्रीय विषय के भिन्न-भिन्न आयामों को स्पर्श करता है। इनमें चर्चित विषय है लोक और शस्त्र के स्वरूप और उनकी व्याप्ति, उनके संबंध-परस्पर, एक-दूसरे में उनकी स्टीठी और गति: साहित्य और काला के अलग-अलग संदर्भों में, अलग-अलग रूपों में उनकी अभिव्यक्ति के साथ ही भोजपुरी,ब्रज,मैथिली मराठी, आदि भाषाओं के संदर्भ में उनके वैशिष्ट्य के अलावा उनमे निहित स्त्री और पर्यावरण संबंधी चिंता और चेतना है।

About the writer

VIDYANIWAS MISHRA

VIDYANIWAS MISHRA पं. विद्यानिवास मिश्र (1926-2005) हिन्दी और संस्कृत के अग्रणी विद्वान, प्रख्यात निबंधकार, भाषाविद् और चिन्तक थे। आपका जन्म गोरखपुर जिले के ‘पकड़डीहा’ ग्राम में हुआ। प्रारम्भ में सरकारी पदों पर रहे। तत्पश्चात् गोरखपुर विश्वविद्यालय, आगरा विश्वविद्यालय, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, काशी विद्यापीठ और फिर सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में प्राध्यापक, आचार्य, निदेशक, अतिथि आचार्य और कुलपति के पदों को सुशोभित किया। कैलिफोर्निया और वाशिंगटन विश्वविद्यालयों में अतिथि प्रोफेसर एवं ‘नवभारत टाइम्स’ के प्रधान सम्पादक भी रहे। अपनी साहित्यिक सेवाओं के लिए आप भारतीय ज्ञानपीठ के ‘मूर्तिदेवी पुरस्कार’, के.के. बिड़ला फाउंडेशन के ‘शंकर सम्मान’, उत्तर प्रदेश संस्कृत अकादमी के सर्वोच्च ‘विश्व भारती सम्मान’, भारत सरकार के ‘पद्मश्री’ और ‘पद्मभूषण’, ‘भारत भारती सम्मान’, ‘महाराष्ट्र भारती सम्मान’, ‘हेडगेवार प्रज्ञा पुरस्कार’, साहित्य अकादमी के सर्वोच्च सम्मान ‘महत्तर सदस्यता’, हिन्दी साहित्य सम्मेलन से ‘मंगलाप्रसाद पारितोषिक’ तथा उ.प्र. संगीत नाटक अकादमी से ‘रत्न सदस्यता सम्मान’ से सम्मानित किये गये और राज्यसभा के मनोनीत सदस्य रहे। बड़ी संख्या में प्रकाशित आपकी पुस्तकों में व्यक्ति-व्यंजक निबन्ध संग्रह, आलोचनात्मक तथा विवेचनात्मक कृतियाँ, भाषा-चिन्तन के क्षेत्रा में शोधग्रन्थ और कविता संकलन सम्मिलित हैं।

Customer Reviews

No review available. Add your review. You can be the first.

Write Your Own Review

How do you rate this product? *

           
Price
Value
Quality