अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान की व्यावहारिक परख

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5229-249-3

लेखक:गुर्रमकोंडा नीरजा

Pages:303

मूल्य:रु495/-

Stock:In Stock

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GURRAMKAUNDA NEERAJA

GURRAMKAUNDA NEERAJA गुर्रमकोंडा नीरजा जन्म: 11 मार्च 1975, चेन्नई। शिक्षा: एम.ए., एम.फिल., पीएच.डी. (हिन्दी), स्नातकोत्तर अनुवाद डिप्लोमा, स्नातकोत्तर पत्राकारिता डिप्लोमा, पी.जी. डिप्लोमा इन मेडिकल लैब टेक्नॉलाजी। प्रकाशन: तेलुगु साहित्य: एक अवलोकन (2012) सम्पादन: भाषा की भीतरी परतें (2012, सदस्य-सम्पादन मंडल), मेरी आवाज (2013, सदस्य-संशोधक मंडल एवं अनुवादक मंडल), उत्तरआधुनिकता: साहित्य और मीडिया (2014)। सहसम्पादक: ‘òवंति’ मासिक (2008 से)। सहायक सम्पादक: ‘भास्वर भारत’ (2012-13)। पुरस्कार: परिलेख हिन्दी साधक सम्मान (2014), आन्ध्र प्रदेश हिन्दी अकादमी का ‘तेलुगुभाषी युवा हिन्दी लेखक’ पुरस्कार (2012), तमिलनाडु हिन्दी साहित्य अकादमी का साहित्य सेवी सम्मान (2014)। सम्प्रति: प्राध्यापक, उच्च शिक्षा और शोध संस्थान, दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा, खैरताबाद, हैदराबाद-500004, मोबाइल: 09849986346

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