इस पार कभी उस पार

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5229-601-9

लेखक:

Pages:100

मूल्य:रु295/-

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Rs.295/-

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रात भर सिरहाने बैठ महकती रही एक रात रात भर बेला के फूलों में बतियाती रही एक रात रात भर मयूर परों में लहराती रही एक रात रात भर संगेमरमर बन पिघलती रही एक रात रात भर मृग छौना बन चौकड़ी भरती रही एक रात रात भर कस्तूरी गन्ध बन नहाती रही एक रात और फिर रात भर बिन सावन सावन बन बरसती रही रात रात भर सपने बुनने झाड़-झंखड़ों में उलझती रातें रात भर कारवाँ बन आँखों में ही गुज़रती रही रातें क्योंकि जिस मोड़ पर मिलने का वादा कर गयी थी ज़िन्दगी उस मोड़ को ठुकराकर चली गयी थी ज़िन्दगी! -पद्मजा घोरपड़े के नए काव्य संग्रह 'इस पार उस पार' से एक कविता रात भर सिरहाने बैठ महकती रही एक रात रात भर बेला के फूलों में बतियाती रही एक रात रात भर मयूर परों में लहराती रही एक रात रात भर संगेमरमर बन पिघलती रही एक रात रात भर मृग छौना बन चौकड़ी भरती रही एक रात रात भर कस्तूरी गन्ध बन नहाती रही एक रात और फिर रात भर बिन सावन सावन बन बरसती रही रात रात भर सपने बुनने झाड़-झंखड़ों में उलझती रातें रात भर कारवाँ बन आँखों में ही गुज़रती रही रातें क्योंकि जिस मोड़ पर मिलने का वादा कर गयी थी ज़िन्दगी उस मोड़ को ठुकराकर चली गयी थी ज़िन्दगी! -पद्मजा घोरपड़े के नए काव्य संग्रह 'इस पार उस पार' से एक कविता

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