हिन्दी और पूर्वोत्तर

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-87648-50-0

लेखक:

Pages:190

मूल्य:रु495/-

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हिन्दी और पूर्वोत्तर

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प्रो. कृपाशंकर चौबे द्वारा सम्पादित यह किताब पूर्वोत्तर भारत की भाषाई विविधता और सकारात्मक पहचान से परिचित कराती है। इस किताब का महत्त्व इस बात में है कि यह पूर्वोत्तर के बारे में एकतरफा नकारात्मक प्रचार को काटती है। प्रो. चौबे ने पूर्वोत्तर की ज़मीन से जुड़े, उसकी मिट्टी की आर्द्रता को महसूस करनेवाले लेखकों की रचनाएँ इस पुस्तक में संकलित की हैं। इसलिए प्रवासी मानसिकता से नहीं, अपितु उस समाज के बीच से उठे हुए लेखकों ने वहाँ की भाषा, संस्कृति और समाज को देखा-परखा और व्याख्यायित किया है। वस्तुतः यह पुस्तक वह आईना है जिसमें पूर्वोत्तर के समाज और वहाँ की संस्कृति के अक्स को हू-ब-हू देखा जा सकता है -प्रो. चन्द्रकला पाण्डेय

About the writer

KRIPA SHANKAR CHAUBE

KRIPA SHANKAR CHAUBE जन्म : 1 जनवरी 1964, नछपरा गाँव, बलिया (उत्तर प्रदेश) भाषा : हिंदी, बांग्ला विधाएँ : आलोचना, निबंध और पत्रकारिता मुख्य कृतियाँ पत्रकारिता के उत्तर आधुनिक चरण, संवाद चलता रहे, रंग, स्वर और शब्द, महाअरण्य की माँ, मृणाल सेन का छायालोक, करुणामूर्ति मदर टेरेसा, समाज, संस्कृति और समय, नजरबंद तसलीमा, पानी रे पानी, चलकर आए शब्द, पत्रकारिता के नए परिदृश्‍य स्तंभलेखन : सन्मार्ग, लोकमत समाचार, दैनिक जागरण और अमर उजाला संपादनः बांग्ला मासिक भाषाबंधन तथा बांग्ला त्रैमासिक वर्तिका का अवैतनिक संपादन। सम्मान साहित्य अकादमी की जूनियर फेलोशिप संपर्क फ्लैट नंबर 306, सत्संग अपार्टमेंट, 400 जीटी रोड, हावड़ा-3

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