कच्चे रंग

Format:Paper Back

ISBN:978-93-89012-25-5

लेखक:

Pages:138

मूल्य:रु200/-

Stock:In Stock

Rs.200/-

Details

जब पानी बरसता है तो समन्दर तक पहुँचने के लिए वो अपना रास्ता खुद ढूँढ़ लेता है... नाला मिले, नदी मिले, या कुछ न मिले तो मिट्टी में जब्ज़ हो कर भी समन्दर तक पहुँच जाता है। मोहित बरस रहा है। उसकी कविता भरे बादलों की तरह आकाश पे छा रही है। वो बरस रहा है और ज़मीं पर बहने लगा है।... मैं साहिल पे खड़ा देख रहा हूँ। वो समन्दर के उछाल को छूने वाला है। मोहित अपनी कविता लेकर हमारे दौर में शामिल हो रहा है। मेरी जेनरेशन पुरानी है। मेरे लिए मोहित नयी जेरनेशन का लिंक है। -गुलज़ार

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About the writer

Mohit Kataria

Mohit Kataria मोहित कटारिया राजस्थान में पले-बढ़े। शिक्षा से कम्प्यूटर इंजीनियर। पेशे से एक बड़ी मल्टीनेशनल कम्पनी में प्रोडक्ट मैनेजर। जज़्बे और सोच से कवि और लेखक। पिछले चौबीस साल से कविता लेखन करते हुए अब तक लगभग 1500 कविताएँ लिख चुके हैं। उनकी कविताएँ ‘नवनीत', ‘काव्या', ‘चकमक' जैसी राष्ट्रीय स्तर की पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। कुछ कविताएँ बैंगलुरु से प्रकाशित कविता-संकलन ‘कर्णकविता' में भी प्रकाशित। कुछ कविताओं का अंग्रेज़ी अनुवाद साहित्य अकादेमी की अंग्रेज़ी द्वि-मासिक ‘इंडियन लिटरेचर' में प्रकाशनाधीन। तीन नाटकों का अंग्रेज़ी से हिन्दी में अनुवाद कर चुके हैं, ‘दम-ए-तस्लीम’, ‘मिराज’ और ‘अश्क नीले हैं मेरे, जिनका मंचन बैंगलुरु, दिल्ली और मुम्बई में हो चुका है। उनकी कविताएँ कई लघु फ़िल्मों में इस्तेमाल की गयी हैं। शौकिया तौर पर अपनी कविताओं की ‘कैलीग्राफ़ी भी करते हैं। ये उनका पहला कविता-संग्रह है।

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