भारतीय भाषा विज्ञान

Format:Paper Back

ISBN:978-81-8143-703-7

लेखक:

Pages:175

मूल्य:रु95/-

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भारतीय भाषा विज्ञान

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'आधुनिक भाषा विज्ञान' पुस्तक का यह दूसरा संस्करण है। यह कहते हुए हमें संतुष्टि का अनुभव हो रहा है कि उच्चतर कक्षाओं के विद्यार्थियों से लेकर हिन्दी के प्रबुद्ध प्राध्यापक तक सब तरह के पाठकों ने इसमें हमरी अपेक्षा से भी अधिक रूचि ली और इसे सराहा। इस पुस्तक में हमने आधुनिक भाषा विज्ञान के सिद्धान्तों पर लिखते हुए इस बात का विशेष रूप से ध्यान रखा है कि यह बोझिल न होने पाये। हमारा प्रयास रहा है कि साफ सुथरे ढंग से सहज और सरल भाषा में भाषा विज्ञान के जटिल सिद्धांतों को व्याख्यारित किया जाय। इसमें सिद्धान्तों की व्याख्या और उनके उदाहरण के लिये हिन्दी भाषा-रूपों का ही चयन किया गया है। एक तरह से इस पुस्तक में सामान्य भाषा विज्ञान के मूल सिद्धान्तों के निरूपण के साथ-साथ हिन्दी भाषा की संरचना पर भी विचार किया गया है। हमने इस बात को भी ध्यान में रखा है कि जो साहित्यकार और बुद्धिजीवी भाषा की संरचनात्मक-आंतरिकता के प्रति जिज्ञासा रखते हैं, वे भी इस पुस्तक से लाभान्वित हो सकें।

About the writer

Kripashankar Singh, Chaturbujh Sahay

Kripashankar Singh, Chaturbujh Sahay कृपाशंकर सिंह शिक्षा : लखनऊ विश्वविद्यालय, भाषा विज्ञान विद्यापीठ, आगरा विश्वविद्यालय तथा पी-एच. डी. दिल्ली विश्वविद्यालय। शोध और अध्यापनः शिकागो विश्वविद्यालय (निहाली जनजाति की भाषा), भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान शिमला में शोध तथा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय और दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्यापन। आजकल पूर्णकालिक लेखन। पुस्तकें : ऋग्वेद, हड़प्पा सभ्यता और सांस्कृतिक निरन्तरता, हिन्दी, उर्दू हिन्दुस्तानी, हिन्दू मुस्लिम साम्प्रदायिकर्ता और अंग्रेजी राज (1800-1947), हायरार्किकल स्ट्रक्चर आव भोजपुरी, भाषाविज्ञान और भोजपुरी, लेक्सिकल बारोइंग इन निहाली फ्राम हिन्दी एण्ड मराठी, आधुनिक आलोचना बनाम शैली विज्ञान, कविता के समानान्तर, रीडिंग्स इन हिन्दी उर्दू लिंग्वीटैक्स, व्यावहारिक आलोचना (सह-लेखन), इतिहास का सच और हिन्दी-उर्दू तथा दक्खिनी हिन्दी (प्रेस में) आदि पुस्तकों के अलावा बहुत से शोध-पत्र प्रकाशित। /चतुर्भुज सहाय शिक्षा : एम.ए., पी-एच.डी. बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय। शोध और अध्ययन : केन्द्रीय हिन्दी संस्थान आगरा में लगभग चालीस वर्षों का शोध तथा अध्यापन का अनुभव । प्रोफेसर पद से अवकाश प्राप्त। पुस्तकें तथा शोध-पत्रः हिन्दी के अव्यय वाक्यांश, हिन्दी पद विज्ञान, हिन्दी क्रिया-काल, पक्ष और वृत्ति (संपादन) के अलावा अनेक शोध पत्र प्रकाशित। केन्द्रीय हिन्दी संस्थान आगरा की शोध पत्रिका 'गवेषणा' का कई वर्षों तक संपादन।

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