पत्र-व्यवहार निर्देशिका

Format:Paper Back

ISBN:978-93-8702-497-7

लेखक:

Pages:260

मूल्य:रु195/-

Stock:In Stock

Rs.195/-

Details

पत्र-व्यवहार निर्देशिका

Additional Information

भारतीय राजभाषा के रूप में संवैधानिक रूप में महत्ता पाकर हिन्दी का अपेक्षित स्वरूप अभी तक स्थापित नहीं हो सका था। कार्यालयों में राज्यादेशों के कारण इसे महत्त्व मिला अवश्य है, पर अभी तक राष्ट्रभाषा और राजभाषा का प्रचलन जिस गति से जन-सामान्य से इतर छात्रों, सेवारत कर्मचारियों एवं अधिकारियों में होना चाहिए था, नहीं हो सका है। विश्वविद्यालय में सामान्य हिन्दी के नाम पर प्रचलित पाठ्यक्रम एवं तद्माध्यम से उपाधिप्राप्त स्नातक कितने उपयोगी हैं, इसका ज्ञान इससे प्रमाणित हो जाता है कि छात्र एक आवेदन-पत्र शुद्ध भाषा एवं सही रूप में लिख पाने में असमर्थ रहता है, फिर ! किसी कार्यालय में लिपिक वर्ग में नियोजित होकर वह क्या योग्यता प्रदर्शित कर सकता है? इसी चिन्तन के आधार पर विश्वविद्यालय में नवीन पाठ्यक्रम तथा प्रतियोगी परीक्षाओं में कार्यालयीय पत्र-लेखन आदि के निर्धारण से व्यावहारिक हिन्दी का महत्त्व बढ़ गया है। व्यावहारिक हिन्दी सम्बन्धी ज्ञान के लिए अनेक प्रकार की उपलब्ध पुस्तकों के बीच अभी तक ऐसी पुस्तक का अभाव था, जो कार्यालय के पत्र-व्यवहारादि के लिए पूर्ण उपयोगी सिद्ध हो सके। इसी दृष्टि से इस पुस्तक का प्रणयन किया गया है।

About the writer

BHOLANATH TIWARI

BHOLANATH TIWARI डॉ. भोलानाथ तिवारी (4 नवम्बर, 1923-25 अक्टूबर, 1989) गाजीपुर (उ.प्र.) के एक अनाम ग्रामीण परिवार में जन्मे डॉ. तिवारी का जीवन बहुआयामी संघर्ष की अनवरत यात्रा थी, जो अपने सामर्थ्य की चरम सार्थकता तक पहुँची। बचपन से ही भारत के स्वाधीनता-संघर्ष में सक्रियता के साथ-साथ अपने जीवन संघर्ष में कुलीगिरी से आरम्भ करके अन्ततः प्रतिष्ठित प्रोफेसर बनने तक की जीवन्त जययात्रा डॉ. तिवारी ने अपने अन्तःज्ञान और कर्म में अनन्य आस्था के बल पर गौरव सहित पूर्ण की। हिन्दी के शब्दकोशीय और भाषा-वैज्ञानिक आयाम को समृद्ध और सम्पूर्ण करने का सर्वाधिक श्रेय मिला डॉ. तिवारी को। भाषा-विज्ञान, हिन्दी भाषा की संरचना, अनुवाद के सिद्धान्त और प्रयोग, शैली-विज्ञान, कोश-विज्ञान, कोश-रचना और साहित्य-समालोचन जैसे ज्ञान-गम्भीर और श्रमसाध्य विषयों पर एक से बढ़कर एक प्रायः अट्ठासी ग्रन्थ-रत्न प्रकाशित करके उन्होंने कृतित्व का कीर्तिमान स्थापित किया।

Customer Reviews

No review available. Add your review. You can be the first.

Write Your Own Review

How do you rate this product? *

           
Price
Value
Quality