स्विमिंग पुल पर टॉपलेस

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5000-250-6

लेखक:

Pages:168

मूल्य:रु250/-

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Rs.250/-

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स्विमिंग पुल पर टॉपलेस

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वह एक ऐतिहासिक दिन था, जब डेनमार्क की स्त्रियों को स्विमिंग पूल पर टॉपलेस होने की आज़ादी मिली। यह नग्नता की दिशा में उठा हुआ एक उच्छृखल क़दम नहीं, बल्कि स्त्री देह को डी-सेक्सुअलाइज करने के संघर्ष का एक महत्वपूर्ण प्रयोग था। जैसे-जैसे सभ्यता अधिक सभ्य होगी, इस तरह के अनेक साहसिक परीक्षण सामने आएँगे। दरअसल, स्त्रीत्व को अपने ढंग से परिभाषित करने की पुरुष इच्छा के इतने भयावह नतीजे निकले हैं कि व्यक्ति मन की बनावट और समाज की व्यवस्था, दोनों ही स्तरों पर गहरी विकृतियों के ज़ख्म दिखाई देते हैं। इतिहास के इस कबाड़खाने में सामान्य स्त्री और सामान्य पुरुष को खोज पाना लगभग असंभव हो चुका है। सबसे ज्यादा उलझन उन समाजों में दिखाई देती है जो परंपरा और आधुनिकता की कशमकश में कभी एक कदम आगे बढ़ाते हैं तो एक कदम पीछे। स्त्री-पुरुष : कुछ पुनर्विचार और स्त्रीत्व का उत्सव जैसी विचारपूर्ण कृत्तियों के सुपरिचित लेखक राजकिशोर स्त्री-प्रश्न से लगातार जूझते रहे हैं। यह मूलतः भारतीय समाज को समझने, उसका विश्लेषण करने तथा बेहतर जीवन और व्यवस्था के सूत्रों की उनकी खोज का एक अहम आयाम है। इस प्रक्रिया में स्त्री विमर्श के समकालीन प्रतिमानों से अलग हट कर वे अपनी दृष्टि विकसित करते हैं, जिसमें स्त्री जीवन से संबंधित आर्थिक, पारिवारिक और राजनीतिक प्रश्नों का निर्णायक स्थान है। इस नए और मौलिक विमर्श में विवाह संस्था के लिए कोई स्थान दिखाई नहीं देता और परिवार समाज के विरुद्ध एक षड्यंत्र साबित होता है। ऐसे ही अनेक साहसिक तथा रचनात्मक प्रस्तावों के कारण यह पस्तक जितनी पठनीय है उतनी ही। विचारोत्तेजक भी।

About the writer

RAJ KISHORE

RAJ KISHORE राजकिशोर 2 जनवरी 1947 को कलकत्ता में जन्म। शिक्षा : कलकत्ता विश्वविद्यालय से एम.ए. (हिन्दी), एलएल.बी. तथा बी. कॉम. (ऑनस)। पत्रकारिता की शुरुआत अगस्त 1977 में आनंद बाजार पत्रिका समूह, कलकत्ता द्वारा प्रकाशित साप्ताहिक 'रविवार' से। 1986-87 में साप्ताहिक 'परिवर्तन' का संपादन किया। 1987 से 1990 तक 'रविवार' के संयुक्त संपादक। 1990 से 1996 तक नवभारत टाइम्स, दिल्ली में वरिष्ठ सहायक संपादक। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में हजारों लेख प्रकाशित हो चुके हैं। मुख्यतः राजनीति, समाज एवं आर्थिक विषयों पर लेखन। संप्रति प्रेस इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की त्रैमासिक पत्रिका 'विदुर' के संयुक्त संपादक। अन्य प्रकाशन : पत्रकारिता के परिप्रेक्ष्य, आजादी एक अधूरा शब्द है, स्त्री-पुरुष : कुछ पुनर्विचार, धर्म, सांप्रदायिकता और राजनीति, हिन्दी लेखक और उसका समाज, जाति कौन तोड़ेगा तथा तुम्हारा सुख (उपन्यास)। संपादन : समकालीन पत्रकारिता : मूल्यांकन और मुद्दे। सह-संपादन : मुसलमान क्या सोचते हैं। लोकप्रिय पुस्तक श्रृंखला ‘आज के प्रश्न' के संपादक, जिसके अंतर्गत अब तक 13 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। पुरस्कार और सम्मान : पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए 1988 में लोहिया पुरस्कार, 1990 में हिन्दी अकादमी, दिल्ली द्वारा साहित्यकार सम्मान तथा 1995 में बिहार राष्ट्रभाषा परिषद, बिहार द्वारा राजेन्द्र माथुर पत्रकारिता पुरस्कार। 1996 में मध्य प्रदेश सरकार की राजेन्द्र माथुर पत्रकारिता फेलोशिप।

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