अवध संस्कृति विश्वकोश - 1

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5229-573-9

लेखक:

Pages:320

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अवध संस्कृति विश्वकोश - 1

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प्राचीन अवध के अन्तर्गत इन आठ राज्यों का उल्लेख प्राप्त होता है-1. वत्स 2. कौशाम्बी 3. कोसल-साकेत 4. श्रावस्ती 5. कान्यकुब्ज 6. अन्तर्वेद 7. भारशिव (बैसवारा) 8. शर्की (जौनपुर)। यही रामराज्य की वास्तविक परिधि थी। यद्यपि कवियों ने रामराज्य को देश-देशान्तर तक व्याप्त दिखाया है, किन्तु वह मंगलाशा मात्र है। गोस्वामी जी ने लिखा है- “सप्तद्वीप सागर मेखला" किन्तु यह कथन एक प्रकार की कवि प्रौढ़ोक्ति है। अकबर ने पूरे मुगल राज्य को 1590 ई. में कुल 12 सूबों में बाँटा था। सूबाए औध में 5 सरकारें थीं-लखनऊ, फैजाबाद, खैराबाद, बहराइच, गोरखपुर। बाद में गोरखपुर अलग कमिश्नरी से जुड़ गया। मध्यकाल में अयोध्या पर समय-समय पर कई वंशों ने राज्य किया, जिनमें मुख्य हैं-1. खिलजी वंश 2. तुगलक वंश 3. मुगल वंश 4. सोलंकी राजा 5. कान्यकुब्ज नरेश 6. परिहार वंश 7. लोदी वंश 8. गहरवार वंश 9. नवाबी शासन। अंग्रेजी शासन में अवध के भीतर सुल्तानपुर, जौनपुर, प्रतापगढ़, टाँडा और मानिकपुर को सम्मिलित कर लिया गया और गोरखपुर को पृथक कर दिया गया। बाद में अयोध्या पर शाकद्वीपीय राजाओं का अधिकार रहा। लाला सीताराम ने 'अयोध्या का इतिहास' में इन सबका विस्तृत विवरण दिया है। इस विशाल क्षेत्र का भौगोलिक परिवेश अत्यन्त बहुरंगी तथा सुरम्य है। इसकी अधिकांश भूमि वनों से ढकी है। भूवैज्ञानिक संरचना की दृष्टि से यह क्षेत्र कई हिस्सों में बँटा है। इस क्षेत्र का काफी भाग हिमालय की तराई (गाँजर) क्षेत्र में आता है। खीरी, बहराइच, गोण्डा, बलरामपुर, सीतापुर, श्रावस्ती जिले इसी गाँजर क्षेत्र के जिले हैं। उत्तर में यह हिमालय की एक समानान्तर श्रेणी है। दूसरा क्षेत्र गंगा यमुना का मैदान (दोआबा) कहलाता है। लखनऊ, कानपुर, उन्नाव, हरदोई, रायबरेली, प्रतापगढ़, फतेहपुर, बाराबंकी, फैजाबाद, अम्बेडकरनगर, अमेठी आदि जिले इसी दोआबा के अन्तर्गत गणनीय हैं। इस भाग के दक्षिण में विंध्य की पहाड़ियाँ हैं। मिर्जापुर का अग्रेतर क्षेत्र बघेलखण्ड कहलाता है। जौनपुर का क्षेत्र पूर्वांचल में आता है। अवध क्षेत्र को उत्तर वैदिक काल में मध्यदेश तथा ब्रह्मर्षि देश कहा जाता था। यह रामायण के नायक राम की लीलाभूमि है। महा जनपद काल के 16 जनपदों में 2 जनपद इसकी सीमाओं से जुड़े थे। यह क्षेत्र मौर्यकाल, गुप्तकाल और हर्षकाल में शक्ति एवं समृद्धि का क्षेत्र रहा है।

About the writer

DR.SURYA PRASAD DIXIT

DR.SURYA PRASAD DIXIT डॉ. सूर्यप्रसाद दीक्षित जन्म: 06 जुलाई, 1938, बन्नावाँ, रायबरेली (उत्तर प्रदेश) प्रोफेसर तथा पूर्व अध्यक्ष, हिन्दी विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय संस्थापक अध्यक्ष: पत्राकारिता एवं जनसंचार विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय। अतिथि प्रोफेसर, लखनऊ, इलाहाबाद, सागर, बड़ौदा, उज्जैन, गोवा, कोचीन, वर्धा, दिल्ली विश्वविद्यालय शोध: (1) ‘छायावादी गद्य’ (पीएच.डी.), (2) ‘व्यावहारिक सौन्दर्यशास्त्रा’ (डी.लिट्.) सम्पादन: ‘उत्कर्ष’, ‘उद्भव’, ‘अवधी’, ‘ज्ञानशिखा’, ‘शोध’, ‘कुलसन्देश’, ‘साहित्य भारती’, ‘संचारश्री, ‘चाणक्य’, ‘प्रभास’, ‘खोज’ स्नेहोपहार: ‘उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान’ से ‘साहित्य भूषण’ सम्मान, 1998; ‘दीनदयाल उपाध्याय सम्मान’, उ.प्र., 2002; हिन्दी साहित्य सम्मेलन से ‘साहित्य वाचस्पति’ उपाधि 1999; इण्टरनेशनल सेण्टर, कैम्ब्रिज से ‘इण्टरनेशनल मैन ऑफ दी इयर’ 1998 से 2013; ‘अमेरिकन इंस्टीट्यूट’ से ‘डिसटिंगिस्ट परसनालिटी ऑफ दी वर्ड’ 1998 से 2013 सम्पर्क: ‘साहित्यिकी’ डी-54, निरालानगर, लखनऊ-226020 मोबाइल: 09451123525 ई-मेल: suryadixit123@gmail.com

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