भारतीयता की पहचान

Format:Hard Bound

ISBN:978-81-8143-170-7

लेखक:

Pages:138

मूल्य:रु195/-

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भारतीयता की पहचान

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'भारतीयता की पहचान' में डॉ. विद्यानिवास मिश्र के पिछले वर्षों में दिये गये कुछ व्याख्यान और निबन्ध संकलित हैं। इन सभी में भारत की उदारता और व्यापक विश्व-दृष्टि को पहचानने की कोशिश की गयी है। श्रेष्ठ निबन्धकार डॉ. मिश्र भारतीयता की पहचान को अपनी ही पहचान मानते हैं और इसकी सार्थकता को निरन्तर अनुभव करते हुए विश्व संस्कृति को समझने के लिए भारतीय संस्कृति को माध्यम बनाते हैं। इन निबन्धों में देशीय या जातीय आग्रह नहीं है, केवल भारतीय संस्कृति के परिप्रेक्ष्य के विश्व संस्कृति को समझने की एक ललक, एक आकांक्षा है। कुमारस्वामी के तात्त्विक तथा कलात्मक चिन्तन से आरम्भ करके निबन्धकार यहाँ लोक और शास्त्र, मनुष्य और उसके परिवेश, विज्ञान और साहित्य के साथ शिव, मातृदेवी का विवेचन करके होली, नवरात्र, रामनवमी, कृष्ण जन्माष्टमी आदि भारतीय त्यौहारों के विवेचन तक आता है। भारतीय एकता और 'वसुधैव कुटुम्बकम्' के परिप्रेक्ष्य में हिन्दू होने का सही अर्थ बताते हुए वह हिन्दू धर्म और संस्कृति को उसकी जड़ों तक खोलता है।

About the writer

VIDYANIWAS MISHRA

VIDYANIWAS MISHRA पं. विद्यानिवास मिश्र (1926-2005) हिन्दी और संस्कृत के अग्रणी विद्वान, प्रख्यात निबंधकार, भाषाविद् और चिन्तक थे। आपका जन्म गोरखपुर जिले के ‘पकड़डीहा’ ग्राम में हुआ। प्रारम्भ में सरकारी पदों पर रहे। तत्पश्चात् गोरखपुर विश्वविद्यालय, आगरा विश्वविद्यालय, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, काशी विद्यापीठ और फिर सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में प्राध्यापक, आचार्य, निदेशक, अतिथि आचार्य और कुलपति के पदों को सुशोभित किया। कैलिफोर्निया और वाशिंगटन विश्वविद्यालयों में अतिथि प्रोफेसर एवं ‘नवभारत टाइम्स’ के प्रधान सम्पादक भी रहे। अपनी साहित्यिक सेवाओं के लिए आप भारतीय ज्ञानपीठ के ‘मूर्तिदेवी पुरस्कार’, के.के. बिड़ला फाउंडेशन के ‘शंकर सम्मान’, उत्तर प्रदेश संस्कृत अकादमी के सर्वोच्च ‘विश्व भारती सम्मान’, भारत सरकार के ‘पद्मश्री’ और ‘पद्मभूषण’, ‘भारत भारती सम्मान’, ‘महाराष्ट्र भारती सम्मान’, ‘हेडगेवार प्रज्ञा पुरस्कार’, साहित्य अकादमी के सर्वोच्च सम्मान ‘महत्तर सदस्यता’, हिन्दी साहित्य सम्मेलन से ‘मंगलाप्रसाद पारितोषिक’ तथा उ.प्र. संगीत नाटक अकादमी से ‘रत्न सदस्यता सम्मान’ से सम्मानित किये गये और राज्यसभा के मनोनीत सदस्य रहे। बड़ी संख्या में प्रकाशित आपकी पुस्तकों में व्यक्ति-व्यंजक निबन्ध संग्रह, आलोचनात्मक तथा विवेचनात्मक कृतियाँ, भाषा-चिन्तन के क्षेत्रा में शोधग्रन्थ और कविता संकलन सम्मिलित हैं।

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