भाषा और व्यवहार

Format:Hard Bound

ISBN:978-81-7055-99-4

लेखक:ब्रज मोहन

Pages:268

मूल्य:रु295/-

Stock:In Stock

Rs.295/-

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भाषा और व्यवहार

Additional Information

व्यावहारिक भाषाविज्ञान को लेकर हिन्दी में जिन विद्वानों ने निरन्तर सोचा और उस पर काम किया, डॉ. ब्रजमोहन का नाम उनमें आदरपूर्वक लिया जाता है। इस सन्दर्भ में उनकी अनेक पुस्तकें हिन्दी में समादृत हैं; और यह उस शृंखला की नयी कड़ी है। भाषा-व्यवहार के जितने भी अंग-उपांग हैं, यह कृति उन्हें अत्यन्त सरल, सुसंगत और रोचक शैली में सामने रखती है। अध्ययनपरक सुविधा की दृष्टि से लेखक ने इस कृति को तीन भागों में नियोजित किया है-एक, संज्ञा-प्रयोग; दो, क्रिया-प्रयोग और तीन, वर्तनी और उच्चारण। इससे स्वतः सिद्ध है कि यह पुस्तक व्यावहारिक भाषाविज्ञान के अत्यंत महत्त्वपूर्ण पक्षों पर एक साथ विचार करती है। डॉ. ब्रजमोहन के कार्य के साथ जो एक अनन्य विशेषता जुड़ी हुई है, वह है विषय-विवेचन की लोक परक संस्कारशीलता। इससे भाषा-व्यवहार की जटिल। से जटिल गुत्थियाँ और बारीकियाँ भी प्रयोगकर्ता के। लिए रोचक और सरल हो उठती हैं। संज्ञा, क्रिया, वर्तनी और उच्चारण आदि भाषा के लिखित और मौखिक व्यवहार-दोनों ही स्तरों पर यह पुस्तक अत्यन्त उपयोगी है, खासकर इस दिशा में कार्य कर रहे। विद्वानों, अध्येताओं, शोधार्थियों, छात्रों और जिज्ञासु पाठकों के लिए।

About the writer

BRIJ MOHAN

BRIJ MOHAN ब्रजमोहन गणितज्ञ होते हुए भी हिन्दी भाषा और उसके व्याकरण के विकास में सक्रिय योगदान के लिए समादृत विद्वान। स्कूली शिक्षा मुरादाबाद (उ.प्र.) में। एम.ए., एलएल.बी. करने के बाद सन् 1934 में इंगलैंड से पीएच.डी. की उपाधि। तत्पश्चात काशी हिंदू विश्वविद्यालय में प्राध्यापक के रूप में नियुक्ति। वहीं, हिन्दी भाषा और व्याकरण पर कार्य करने का संकल्प और उसे पूरा करने की दिशा में लगातार अध्यवसाय। हिन्दी की विशिष्ट सेवा के लिए उत्तर प्रदेश राजकीय पुरस्कार से सम्मानित। सेंट्रल हिंदू कॉलेज, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में गणित विभाग के अध्यक्ष और फिर प्राचार्य रहे। वर्ष 1990 में देहावसान। प्रमुख प्रकाशित कृतियाँ : गणितीय कोश, गणित का इतिहास, अर्थ-विज्ञान, अवकलन गणित, मायावर्ग, चिह्न विज्ञान : उत्पादन और सांस्कृतिक संदर्भ, हिन्दी की प्रकृति और शुद्ध प्रयोग, विशेषण प्रयोग, किस्सा : एक से एक, भाषा और व्यवहार, सरल गणित-ज्यामिति, शुद्ध गणित की पाठचर्चा, रूपान्तर कलन, अंग्रेज़ी-हिन्दी वैज्ञानिक कोश (खंड : 1-2), नागरी लिपि : रूप और सुधार, शब्द-चर्चा, मानक हिन्दी आदि।

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