प्रशासनिक हिंदी प्रयोग और संभावनाएँ

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-8764-885-2

लेखक:

Pages:300

मूल्य:रु650/-

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प्रशासनिक हिंदी प्रयोग और संभावनाएँ

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हर भाषा का अपना शब्द भण्डार, अपनी लेखन शैली, अपनी व्याकरणिकता होती है, जो उस भाषा को अन्य भाषाओं से पृथक करती है। जब कोई भाषा अलग-अलग क्षेत्रों में व्यवहार की भाषा बन जाती है, तो सन्दर्भ के अनुसार उसकी शब्दावली और वाक्य संरचना में भिन्नता आ जाती है, जिससे उसके भिन्न-भिन्न भाषा रूप उभर आते हैं। राजभाषा हिन्दी की भी वही स्थिति है। हिन्दी में इस व्यावहारिक पक्ष पर विचार करते हुए प्रशासनिक कार्यालयों में हिन्दी की वर्तमान स्थिति तथा भविष्य में उसके प्रयोग की सम्भावना पर इस पुस्तक में विस्तार से विवेचन किया गया है। भारत की स्वतन्त्रता के उपरान्त संविधान में हिन्दी को राजभाषा का दर्ज़ा दिया गया, जिसके अनुसार प्रशासन के विभिन्न प्रयोजनों के लिए हिन्दी का प्रयोग किया जाता है, परन्तु भारत की भाषायी स्थिति को देखते हुए, प्रस्तुत विषय को यह मानकर, प्रतिपादित किया गया है कि प्रशासन में मुख्यतः अंग्रेज़ी का ही प्रयोग होता है और हिन्दी उसको आधार बनाकर प्रयुक्त होती है। चूँकि व्यावहारिक दृष्टि से राजभाषा हिन्दी और उसकी वाक्य संरचना उसकी प्रकृति से भिन्न है, इसलिए यहाँ इस भाषायी संरचना का विश्लेषण प्रशासन के परिप्रेक्ष्य में करने का प्रयास किया गया है।

About the writer

Dr. P.P.Andal

Dr. P.P.Andal डॉ. प. प. आंडाल जन्म: 03 जनवरी 1942, सामलकोट, आन्ध्र प्रदेश। तमिल, तेलुगु, हिन्दी व अंग्रेज़ी में निष्णात। अनुभव : दक्षिण मध्य रेलवे, सिकन्दराबाद के राजभाषा विभाग में 20 वर्ष से अधिक अवधि तक विभिन्न स्तरों पर कार्यरत तकनीकी तथा विधि सम्बन्धी सरकारी साहित्य का अनुवाद। वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी के रूप में 1992 में सेवानिवृत्त। प्रकाशन : शब्दावली हिन्दी और तेलुगु में प्रशासनिक हिन्दी और तेलुगु में प्रशासनिक शब्दावली, अनुवाद में हास्य रस-हिन्दी प्रचार समाचार, मद्रास, दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा, मद्रास; सम्पर्क लिपि देवनागरी (भारतीय रेल, रेलवे बोर्ड, नयी दिल्ली); क्षेत्रीय भाषाओं में पारिभाषिक शब्दावली-एकरूपता की आवश्यकता; रेलों की भाषा में क्षेत्रीय भाषाओं का स्थानः हिन्दी और तेलुगु-कितनी दूर, कितनी निकटः ध्वनि, लिपि और आशुलिपि; विज्ञापनों में भाषा का वर्चस्व; प्रयोजनमूलक तेलुगू- 1996-'गवेषणा' पत्रिका, केन्द्रीय हिन्दी संस्थान, आगरा; आन्ध्र में तेलुगू-राजभाषा के रूप में विकास की गतिविधियाँ। विशेष अभिरुचि : अनुसन्धान प्रकार का कार्य तथा भारतीय भाषाओं का तुलनात्मक अध्ययन व अनुवाद। निवास स्थान : 23/ए ईश्वपुरी कॉलोनी, सैनिकपुरी, सिकन्दराबाद-500094 (आन्ध्र प्रदेश)।

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