FASAADI

Format:Hard Bound

ISBN:81-8143-041-7

Author:ISMAT CHUGHATAI

Pages:120

MRP:Rs.200/-

Stock:In Stock

Rs.200/-

Details

फ़सादी

Additional Information

इस्मत का ‘फ़सादी' नाम से लघु नाटकों का संग्रह भी प्रकाशित है। ‘फ़सादी' नाटक इस्मत की पहली प्रकाशित रचना है, जिसका प्रकाशन उर्दू मासिक ‘साकी' (1938 ई.) में हुआ। ये नाटक ख़ास तौर पर सांप्रदायिकता के ख़िलाफ़ व्यापक जनांदोलन की जरूरत के तहत लिखे गए हैं। भारत विभाजन के बाद भड़की सांप्रदायिक आग को बुझाने और अवाम में सांप्रदायिक सौहार्द व भाईचारा कायम करने के उद्देश्य में नाटकों से बड़ी मदद ली जा सकती थी। जनता से सीधे संवाद की विधा होने के कारण इस्मत के नाटकों ने बिगड़ी हुई फ़ज़ा को बनाने-सुधारने में अहम भूमिका अदा की। इनमें से 'धानी बांके', नाटक का तो 1947 के बाद बम्बई के अलावा देश के अन्य दंगाग्रस्त इलाकों में अनेक बार मंचन हुआ। इन लघु नाटकों की साहित्यिक मूल्यवत्ता पर बहस हो सकती है लेकिन यह बात यकीनी है कि इनमें लेखिका के सामाजिक सरोकारों को प्रभावशाली अभिव्यक्ति मिली है।

About the writer

ISMAT CHUGHATAI

ISMAT CHUGHATAI इस्मत चुगताई (1912-1992) उर्दू कथा साहित्य में अपनी बेबाक अभिव्यक्ति के लिए अलग से जानी जाती हैं। उनकी कृतियों में मानवीय करुणा और सक्रिय प्रतिरोध का दुर्लभ सामंजस्य है जिसकी बिना पर उनकी सर्जनात्मक प्रतिमा की एक विशिष्ट पहचान बनती है। इस्मत चुगताई शुरुआत से ही प्रगतिशील साहित्यांदोलन से जुडी रहीं और जब जरूरत हुई, उन्होंने कंधे से कंधा मिलाकर काम किया लेकिन कभी खुद को तरक्की पसन्द कहलाने का आग्रह नहीं किया। आन्दोलन के पहले उभार के दौरान प्रगतिशील लेखकों के उर्दू मुख-पत्र ‘नया अदब’ में प्रकाशित उनकी कहानियों के जरिए प्रगतिशील कथालेखन का एक नया रुजहान सामने आया। उन्होंने प्रगतिशील कथा-आलोचना के प्रतिमानों के सामने चुनौती खड़ी कर दी।

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