NIBANDHON KI DUNIYA : KEDARNATH AGARWAL

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5072-162-9

Author:KEDARNATH AGARWAL

Pages:193


MRP : Rs. 395/-

Stock:In Stock

Rs. 395/-

Details

निबन्धों की दुनिया : केदारनाथ अग्रवाल

Additional Information

प्रगतिशील लेखन के प्रमुख स्तम्भों में केदारनाथ अग्रवाल अग्रणी हैं। संवेदनशील भाव-तन्त्र और गहन वैचारिकता की संहिति से उनकी सृजनशीलता आकार लेती हैं-कविता और गद्य दोनों में। उनकी गद्य-रचनाओं का वस्तुजगत उतना ही ठोस, मूर्त और पारदर्शी है जितना उनके काव्य का। न दुराव-छिपाव न भाषिक पेचीदगियाँ । अपने निबन्धों में उन्होंने अपनी कविता की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और वैचारिक आधार का खुलासा किया है। निबन्धों में उनका बौद्धिक, अपने सृजन के वैचारिक आधार के प्रखर प्रवक्ता के रूप में सामने आता है। उनकी शैली में ध्वंसात्मकता, हठाग्रह और दुर्भाव से नहीं निश्छल आत्मविश्वास और वैचारिक निष्ठा से पैदा होती है। केदारनाथ अग्रवाल की ख्याति यद्यपि कवि-रूप में अधिक हुई, पर उनका चिन्तक भी काव्य-सृजन के समानान्तर सक्रिय रहा। उन्होंने काव्य और जीवन से सम्बद्ध अनेक प्रश्नों पर विचार करने के अलावा अपने वर्तमान और अतीत दोनों समय-खण्डों के रचना-कर्म का लेखा-जोखा भी प्रस्तुत किया-पूरे समीक्षात्मक-विवेक के साथ। उनकी हर बात से सहमति भले ही न हो, पर उनकी वैचारिक दृढ़ता और बेबाक अभिव्यक्ति में सन्देह की गुंजाइश नहीं मिलती। प्रस्तुत निबन्ध संग्रह इस चिन्तक रचनाकार की मानसिक बनावट और समीक्षात्मक-विवेक का साक्षात्कार कराएगा और मूलतः अभिधा की शक्ति और सौन्दर्य के कृतिकार रूप से साझेदारी का अवसर भी प्रदान करेगा।

About the writer

KEDARNATH AGARWAL

KEDARNATH AGARWAL केदारनाथ अग्रवाल जन्म : 01 अप्रैल 1911, कमासिन, बाँदा (उत्तर प्रदेश) भाषा : हिन्दी विधाएँ : कविता, आलोचना, संस्मरण, पत्र मुख्य कृतियाँ कविता संग्रह : ‘युग की गंगा’ , ‘फूल नहीं रंग बोलते हैं’ , ‘पंख और पतवार’, ‘गुलमेंहदी’ , ‘हे मेरी तुम!’,’ बोले बोल अबोल’,’ मार प्यार की थापें’, ‘अपूर्वा’, ‘अनहारी हरियाली’, ‘आग का आईना’, ‘आत्मगन्ध’, ‘खुली आँखें खुले डैने’, पुष्प दीप और ‘बम्बई का रक्त स्नान’ (आल्हा)। ‘कहें केदार खरी खरी’,’ कुहकी कोयल’,’ खड़े पेड़ की देह’,’ जमुन जल तुम’,’ जो शिलाएँ तोड़ते हैं’, वसन्त में प्रसन्न हुई पृथ्वी (सभी अशोक त्रिपाठी के सम्पादन में) आलोचना : ‘विचार बोध’,’ विवेक विवेचना’, ‘समय समय पर’ संस्मरण : ‘बस्ती खिले गुलाबों की’ (रूस यात्रा के संस्मरण) पत्र : ‘मित्र संवाद – 1’ ,’ मित्र संवाद – 2’ (केदारनाथ अग्रवाल और रामविलास शर्मा के पत्रों का संकलन) अनुवाद : ‘देश-देश की कविता’ (पाब्लो नेरूदा और अन्य कवियों की कविताओं के अनुवाद) सम्मान : साहित्य अकादेमी पुरस्कार निधन : 22 जून 2000

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