PRABANDHAN PANIPAT SE TITENIC VIA KURUKSHETRA

Format:Paper Back

ISBN:978-93-5000-285-8

Author:SHIRAM MUNDE

Pages:140

MRP:Rs.275/-

Stock:In Stock

Rs.275/-

Details

यमुना एक असाधारण नदी है। इसी नदी के किनारे देश की, भारतीय उप महाद्वीप की समूची चेतना घनीभूत हुई है। यही नदी है, जिसमें कालिया नाग को दबोच-दबोच कर गोकुल के कान्हा ने खत्म किया था, इसी के किनारे मर्यादा तोड़कर आने के लिए राधा दिन-रात तड़पती थी। यही है वह नदी जिसमें मार्गशीर्ष की हर सुबह चार-पाँच बजे ही हजारों गोपियाँ नहाने आती थीं। इसी नदी के निवात पानी में राधा अपना रूप निहारते-निहारते माँग सँवारती थी। शस्त्रास्त्र से लदी हुई युयुत्सु नौकाएँ कुरुक्षेत्र की दिशा में इसी नदी से होते हुए गई थीं। शत्रु के आक्रमण से ध्वस्त रथ के पुर्जे और पहिये यमुना की सतह से बहते हुए गए थे। ध्वज, झंडे और पताकाएँ नदी के बहाव में, प्रभाव में बहती गई थीं और ऐसे ही किनारे गोपियाँ अपने वस्त्र, आभूषण उतारकर नहा रही थीं कि कान्हा अपनी टोली लेकर आ गया, सबके वस्त्रा बटोर लिए और देर तक गोपियों को त्रस्त और हैरान करता रहा। ऐसी ही तैरती रहो, सर्दी में काँपती रहो, उजाला होगा तो लोग देखेंगे।

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