MEIN BASHIR HOON…

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5000-246-9

Author:BASHIR BADRA

Pages:168


MRP : Rs. 250/-

Stock:In Stock

Rs. 250/-

Details

मैं ‘बशीर’ हूँ...

Additional Information

हर बड़े शायर को कड़ी आज़माइशों से गुज़रना होता है। मीर को अपनी अज़मत के इज़हार के लिए अज़गर नामा लिखने की जरूरत पड़ी। ग़ालिब ने क्या क्या मारका आराइयाँ की। फ़ैज़ जिन्हें उनकी ज़िन्दगी में मक़बूलिअल और इज़्ज़त मिल गई उन्हें भी आसानी से यह रुतबा नहीं मिला था। गज़िशता तीस बरस में बशीर बद्र ने भी ये सख़्तियाँ झेली हैं। ‘इकाई' से लेकर ‘आमद' तक इन बड़ी-बड़ी आज़माइशों से वो गज़रे हैं। उनकी ग़ज़लों की पहली किताब 'इकाई' ने हमारे अदब में तहलका मचा दिया था। एक अजीब शान और धूम से बशीर बद्र ग़ज़ल की दुनिया में आये लेकिन इस पर भी बड़े सर्दो गर्म मौसम गुज़रे, तब वो यहाँ तक पहुँचे हैं। -प्रो. गोपी चन्द्र नारंग / बशीर बद्र की ग़ज़ल पढ़ते हुए मैंने हर लफ़्ज का मुनफ़रद ज़ायका महसूस किया है। खुरदुरे से खुरदुरे और ग़ज़ल बाहर अल्फ़ाज भी उनके अशआर में नर्म, मीठे और सच्चे लगते हैं। -कुमार पाशी / ग़ालिब के बाद बशीर बद्र के अशआर में जो ताज़गी. शगुफ़्तगी, नदरत और बलाग़त है वो शायद उर्दू अदब के पूरे एहदेमाज़ी में कहीं नहीं।–जगतार / नई ग़ज़ल पर किसी भी उनवान से गुफ़्तगू की जाये बशीर बद्र का जिक्र जरूर आयेगा। वो एक सच्चे और ज़िन्दा शायर हैं। -शहरयार / बशीर बद्र की आवाज़ दूर से पहचानी जाती है। -निदा फ़ाज़ली / ग़ज़लगो की हैसियत से बशीर बद्र की सलाहियतों पर इमान न लाना कुफ्र है। -मोहम्मद हसन /डॉ. बशीर बद्र से जब मिला था तो लगा ज़िन्दगी ने एक और एहसान किया। उनकी ग़ज़ल आज ही के दौर का एहसास होता है, वह कुल्ले साफ़े पहनी ग़ज़ल नहीं लगती। वे दो शेरों के बाद जैसे एक नुक्ते के गिर्द पूरे एक सबजेक्ट का दायरा बनाने लगते हैं। उनकी ग़ज़ल का शेर सिर्फ एक ख्याल नहीं रह जाता, हादसा भी बन जाता है, अफ़साना भी। मैं डॉ. बशीर बद्र का बहुत बड़ा फ़ैन हूँ। -गुलज़ार

About the writer

BASHIR BADRA

BASHIR BADRA डॉ॰ बशीर बद्र (जन्म 15 फ़रवरी 1935) को उर्दू का वह शायर माना जाता है जिसने कामयाबी की बुलन्दियों को फतेह कर बहुत लम्बी दूरी तक लोगों की दिलों की धड़कनों को अपनी शायरी में उतारा है। साहित्य और नाटक अकादमी में किये गये योगदानों के लिए उन्हें 1999 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। इनका पूरा नाम सैयद मोहम्मद बशीर है। भोपाल से ताल्लुक़ात रखने वाले बशीर बद्र का जन्म कानपुर में हुआ था। आज के मशहूर शायर और गीतकार नुसरत बद्र इनके सुपुत्र हैं। डॉ॰ बशीर बद्र 56 साल से हिन्दी और उर्दू में देश के सबसे मशहूर शायर हैं। दुनिया के दो दर्जन से ज़्यादा मुल्कों में मुशायरे में शिरकत कर चुके हैं।

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