SHIKSHA KI PARIKSHA

Format:Hard Bound

ISBN:81-8143-051-4

Author:RAMESH THANVI

Pages:124

Discount 25%
MRP : Rs. 150/- Rs. 113/-

Stock:In Stock

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Details

शिक्षा चिन्तन की कोई पुस्तक शास्त्र न बनकर एक रम्य रचना बन जाए तो इसे घटना माना जा सकता है। शिक्षा की परीक्षा ऐसी ही एक पुस्तक है। शिक्षा सरोकारों को सार्वजनीन बनाने वाली पुस्तक। शिक्षा चिन्तन को सरल भाषा में व्यक्त करती है। पढ़ने में बाँधने वाली पुस्तक। साथ ही समकालीन शिक्षा परिदृश्य की तमाम विडम्बनाओं को रेखांकित करने वाली पुस्तक। कोई क्या उत्तर दे कि शिक्षा बालक की प्रतिष्ठा क्यों नहीं कर सकी अब तक? शिक्षा क्यों प्रश्नों का पहरे बिठाती रही अब तक? कैसे देखती रही शिक्षा कि हमारा बीज बोने वाली शिक्षा हिंसक राज और समाज की हिंसा को जायज मानती रही? कई ज्वलन्त प्रश्नों पर भाषा एवं विचार की मौलिकता के साथ यह पुस्तक पाठकों से बात करती लगती है। यह पुस्तक समाज-परिवर्तन में पाठक की सक्रिय भूमिका में विश्वास करती है।

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About the writer

RAMESH THANVI

RAMESH THANVI 1945, पहली अगस्त को उत्तर-पश्चिमी राजस्थान के कस्बे फलोदी जिला जोधपुर में जन्म। शिक्षा कई गांवों में और फिर जयपुर व जोधपुर में। जोधपुर विश्वविद्यालय से दर्शन शास्त्र में एम. ए. करने के बाद दिल्ली में भारतीय ज्ञानपीठ में पुस्तक संपादन एवं पुरस्कार चयन प्रक्रिया का कार्य। फिर प्रतिपक्ष साप्ताहिक में संपादन सहयोग। आपातकाल के कारण 1976 में जयपुर वापसी। 1976 में ही राजस्थान प्रौढ़ शिक्षण समिति के तत्वावधान में प्रौढ़ शिक्षा के राज्य संदर्भ केन्द्र की स्थापना। यह देश का पहला संदर्भ केन्द्र था। 20 वर्ष तक इस केन्द्र के संस्थापक निदेशक का कार्य। इस बीच ही कई पूर्वी एवं पश्चिमी देशों में शिक्षा कार्यक्रमों का अध्ययन। प्रौढ़ शिक्षा का पहला पाठ पढ़ने 1976 में वियतनाम की यात्रा। 1980 में इंग्लैंड के साउथैम्टन विश्वविद्यालय के प्रौढ़ शिक्षा विभाग में सहयोगी फैलो के रूप में अध्यापक एवं प्रशिक्षण। राजस्थान में महिला विकास, शिक्षाकर्मी, लोकजुबिश जैसे कई शिक्षा कार्यक्रमों में संकल्पना स्तर से ही सक्रिय भागीदारी। प्रौढ़ शिक्षा में प्रस्तुत प्रकाशन, शिक्षा-सामग्री सुजन एवं प्रशिक्षण के क्षेत्र में कई नवाचार। पुस्तकें : घड़ियों की हड़ताल (किशोर उपन्यास) " बदलाव का अधिकार (लंबी कविता) 9 भारतीय भाषाओं में इसके अनुवाद नेशनल बुक ट्रस्ट से प्रकाशित * दौड़ा-छौड़ा मन का घोड़ा (बालगीत) ' गुन गुन गुन (बाल गीत) * नीली झील (कमलेश्वर की कहानी का लोकोपयोगी रूपांतर, नेशनल बुक ट्रस्ट से प्रकाशित) * भोर भई (बालगीत) * सोने का किला : सत्यजित राय-बांग्ला से अनुवाद संप्रति : वरिष्ठ सलाहकार, राजस्थान प्रौढ़ शिक्षण समिति, जयपुर एवं समकालीन शिक्षा चिंतन की मासिक पत्रिका अनौपचारिका का संपादन।

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