AAJ BAZAR BAND HAI

Format:Hard Bound

ISBN:81-8143-110-3

Author:MOHANDAS NAIMISHRAI

Pages:150


MRP : Rs. 395/-

Stock:In Stock

Rs. 395/-

Details

आज बाजार बन्द है

Additional Information

विश्व में आदिकाल से समाज पर सम्भोग दर्शन काबिज रहा है जिसके सामने सभी दर्शन फीके रहे हैं। भारतीय समाज और आध्यात्मिकता का दर्शन भी इससे अछूता नहीं रहा बल्कि धार्मिक परम्पराओं ने देह दर्शन की ओर भी अलौकिक तरीके से शुरुआत की है। मन्दिरों में नारी उत्पीड़न की उसी परम्परा को विकसित किया। देवदासियों से लेकर वेश्याओं की मार्मिक कथा ‘आज बाज़ार बन्द है’ है। देह व्यापार से देह उत्सव की रंगरलियों की भूल-भुलैया में फँसी दलित महिलाओं की दारुण कथा का जैसे सजीव चित्रण हुआ है।

About the writer

MOHANDAS NAIMISHRAI

MOHANDAS NAIMISHRAI मोहनदास नैमिशराय एक ऐसी शख़्सियत हैं, जो बचपन से ही जीवन के यथार्थ से रू-ब-रू हो गये थे। जिन्होंने बचपन में तथागत बुद्ध को याद करते हुए 'बुद्ध वन्दना' में शामिल होना शुरू कर दिया था। उनके दर्शन से जुड़े। इसलिए कि डॉ. अम्बेडकर का मेरठ में हुआ भाषण उनकी स्मृति में था। जैसा उन्होंने स्वयं अपनी आत्मकथा ‘अपने-अपने पिंजरे' में लिखा है-6 दिसम्बर, 1956 को जब बाबा साहेब का परिनिर्वाण हुआ, जब उनकी बस्ती में कोई चूल्हा नहीं जला था। उदास चूल्हे, उदास घर और उसी उदासी के परिवेश की गिरफ्त में दलित। नैमिशराय जी के लेखकीय खाते में दो कविता संग्रह के साथ पाँच कहानी संग्रह, पाँच उपन्यास से इतर दलित आन्दोलन पत्रकारिता से इतर अन्य विषयों पर 50 पुस्तकें दर्ज हुई हैं। उन्होंने अंग्रेज़ी तथा मराठी से अनुवाद भी किये। वे भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (राष्ट्रपति निवास), शिमला में फेलो भी रहे। साथ ही डॉ. अम्बेडकर प्रतिष्ठान, नयी दिल्ली में मुख्य सम्पादक के रूप में उन्होंने अपनी ज़िम्मेदारी निभायी।

Customer Reviews

No review available. Add your review. You can be the first.

Write Your Own Review

How do you rate this product? *

           
Price
Value
Quality