CHOOT GAYA PADAV

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5000-212-4

Author:DR. RAMESH POKHRIYAL

Pages:130


MRP : Rs. 250/-

Stock:In Stock

Rs. 250/-

Details

छूट गया पड़ाव

Additional Information

'निशंक' का यह नवीनतम उपन्यास एक छोटे से गाँव बिनगढ़ के जनजीवन और अशिक्षा से घिरे समाज की विसंगतियों को व्यापक फलक पर उठाता है। यह शिक्षा ही है, जो अँधेरे से घिरे जीवन को इसकी नायिका सरोज के माध्यम से नई रोशनी देती है। लेखक ने इस उपन्यास में सार्थक शिक्षा के उद्देश्य को रेखांकित करते हुए एक स्थान पर सरोज के माध्यम से कहा है, “गुरु का धर्म सिर्फ़ शिक्षा ही नहीं, संस्कार और समाज को सम्बल देना भी है। गुरु सामाजिक ही नहीं है, तो हुआ करे विद्वान उसकी विद्वत्ता किस काम आएगी।" एक तरह से यह दृष्टिकोण ही इस उपन्यास का मेरुदण्ड है। बिनगढ़ में सब कुछ होते हुए भी कुछ सचेत गाँव वालों को यह चिन्ता सताती रहती है कि यहाँ शिक्षा की व्यवस्था नहीं है। स्कूल है, किन्तु अध्यापक नहीं। जो अध्यापक आता है, वह टिकता नहीं। इन्हीं सचेत गाँववालों में से एक हैं आनन्द सिंह, जो बहुत प्रयास कर अध्यापिका सरोज का स्थानान्तरण कराके लाते हैं। यह अध्यापिका ही उपन्यास की नायिका है और इस गाँव की काया पलटने के क्रम में पूरे पर्वतीय समाज में परिवर्तन का प्रतीक बन कर उभरती है। यह परिवर्तन शिक्षा और समाज सेवा के माध्यम से तथा एक शिक्षित नारी की सामाजिक प्रतिबद्धता के द्वारा होता है। यह भी कम महत्त्वपूर्ण नहीं है कि 'निशंक' ने इस लघु उपन्यास में भाषा का प्रयोग सर्वत्र जीवित दृश्य की भौति किया है। कथा प्रवाह में बहते हए कोई भी पाठक इन 'दृश्यों' को 'देखता चलता है और लेखकीय निहितार्थों को भी अपने भीतर उतारता चलता है। यही इस उपन्यास की सफलता का रहस्य भी है।

About the writer

DR. RAMESH POKHRIYAL

DR. RAMESH POKHRIYAL मूल नाम : डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक जन्म : 15 अगस्त 1959, पिनानी , पौड़ी गढ़वाल तत्कालीन (उत्तराखण्ड) भाषा : हिंदी विधाएँ : कविता संग्रह, कथा संग्रह, पत्र-संकलन, उपन्यास मुख्य कृतियाँ कविता संग्रह- समर्पण; नवाकुर, मुझे विधाता बनना है, तुम भी मेरे साथ चलो; मातृभूमि के लिए; जीवन पथ में; कोई मुश्किल नहीं; प्रतीक्षा; ए वतन तेरे लिए कथा संग्रह- रोशनी की एक किरण; बस एक ही इच्छा; क्या नहीं हो सकता; भीड़ साक्षी है; खडे़ हुए प्रश्न; विपदा जीवित है; एक और कहानी; मेरे संकल्प पत्र-संकलन- मेरी व्यथा-मेरी कथा उपन्यास- निशान्त, मेजर निराला; बीरा; पहाड़ से ऊंचा संपर्क 37/1 विजय कॉलोनी, रवीन्द्र नाथ टैगोर मार्ग, देहरादून, उत्तराखण्डर ई-मेल nishankramesh@gmail.com

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