Mantrimandal

Format:Hard Bound

ISBN:978-81-7055-487-5

Author:RAJKRISHAN MISHRA

Pages:640


MRP : Rs. 695/-

Stock:In Stock

Rs. 695/-

Details

मंत्रिमण्डल

Additional Information

उस दिन राजभवन में, मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण में, केवल तीन मंत्री बन पाये थे, स्वयं उत्सुकदास, दूसरे लोबीराम और तीसरे थे भीमसिंह उत्सुकदास का मन बड़ा उदास था... मुख्यमंत्री उत्सुकदास जिलाधिकारी फैज़ाबाद को बाबरी मस्जिद उर्फ़ राममंदिर का ताला खुलवाने का आदेश देकर चले गए, लेकिन...मौनी बाबा की आँखें बंद थीं। उत्सुकदास बोले, 'बाबा, यद्यपि मुझे मुख्यमंत्री बना दिया गया है, मेरे किसी आदमी को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया है। यहाँ तक कि मेरे विशेष राजनैतिक शिष्य को मंत्री बनाना तो दूर रहा, पार्टी से निलम्बित होने तक से मैं नहीं रोक सका...” भारतीय राजनीति को अपने मौन के चलते कहाँ से कहाँ पहुँचा दिया है इन मौनी बाबाओं ने! राजनीतिक उपन्यासों के लेखन में सिद्धहस्त राजकृष्ण मिश्र के इस नये उपन्यास में एक प्रदेश के बहाने पूरे भारत राष्ट्र की राजनीतिक दशा-दुर्दशा को बेनकाब किया गया है। लेखक का दावा है कि उनके राजनीतिक उपन्यासों के इन तीन खंडों (काउंसिल हाउस, दारुलशफ़ा और मंत्रिमंडल) को पढ़ने के बाद, पढ़नेवाला वह व्यक्ति नहीं रहेगा, जो वह पहले था।

About the writer

RAJKRISHAN MISHRA

RAJKRISHAN MISHRA राजकृष्ण मिश्र जन्म : 3 अगस्त, 1940 को वाराणसी में। सृजन : खलील जिब्रान और गुरुदेव टैगोर की गीतांजलि की परंपरा में 'कामना का क्षितिज' शीर्षक से रेखाचित्र (1975), उपन्यास-त्रयी काउंसिल हाउस', 'दारूलशफ़ा' और 'मंत्रिमंडल' (1996), 'हैलो' (उपन्यास-1985) और 'कुतो मनुष्यः (उपन्यास-1994), 'चालान' (नाटक1978), 'बजट' (नाटक-1996), 'आईना' (कहानी-संग्रह-1996), 'बिखराव का संकट (निबंध-संग्रह-1996) में प्रकाशित। संप्रति : 'सरस्वती' पत्रिका के पुनर्प्रकाशन और पूर्णकालिक लेखन में संलग्न। सम्मान : वर्ष 1984, 1985 में साहित्य अकादमी के लिए 'सचिवालय' (काउंसिल हाउस) नामांकित। आपकी कृतियों पर लखनऊ विश्वविद्यालय में स्वतंत्र शोधकार्य चल रहा है। पिछले डेढ़ दशक • से विभिन्न विश्वविद्यालयों के स्नातकोत्तर पी-एच. डी., डी.लिट् के शोध ग्रंथों में उपन्यास त्रयी के शुरुआती दो खंडों को रेखांकित और उल्लेखित किया जा रहा है। संपर्क : 48, वाल्मीकि मार्ग, हजरतगंज, लखनऊ।

Books by RAJKRISHAN MISHRA

Customer Reviews

No review available. Add your review. You can be the first.

Write Your Own Review

How do you rate this product? *

           
Price
Value
Quality