PUNARWAK

Format:Hard Bound

ISBN:81-7055-503-5

Author:DR. NAGENDRA

Pages:108

MRP:Rs.85/-

Stock:In Stock

Rs.85/-

Details

पुनर्वाक्

Additional Information

पुनर्वाक के इन निबंधों के विषय-चिंतन के स्तर में काफ़ी विविधता है। 'विश्व-साहित्यशास्त्र की परिकल्पना' और भारतीय महाकाव्य' में व्यापक सार्वभौम अथवा भारतीय स्तर पर विषय का विवेचन किया गया है। 'समसामयिक हिन्दी साहित्य : उपलब्धियाँ' और 'हिन्दी भाषा तथा साहित्य के विकास में दिल्ली का योगदान' की विषय परिधि स्वभावतः सीमित है। तुलसी-विषयक निबंधों में वर्तमान जीवन-संदर्भ में तुलसी के काव्य की प्रासंगिकता को सिद्ध करने का प्रयास है। पस्तक में स्व. गिरिजाकमार माथुर और राय कृष्णदास का स्मरण और आत्मीय संस्मरण हैं, वहीं 'विश्व काव्य चयनिका' में कतिपय कालजयी कृतियों का डॉ. नगेन्द्र द्वारा किया गया काव्यानुवाद है जिन्हें कृतिकार ने अपने कविकर्म के पुनर्वाक (पोस्ट स्क्रिप्ट) के रूप में प्रस्तुत किया है। डॉ. नगेन्द्र के जीवन के 80 वर्षों पर डॉ. कृष्णदत्त पालीवाल और डॉ. गंगाप्रसाद विमल की डॉ. नगेन्द्र से बातचीत ने इस संग्रह को न केवल समग्रता दी है, इसे शोधार्थियों के लिए नितांत उपयोगी बना दिया है।

About the writer

DR. NAGENDRA

DR. NAGENDRA डॉ. नगेन्द्र जन्म : 22 मार्च, 1915 को जिला अलीगढ़ (उ.प्र) के अतरौली कस्बे में। शिक्षा : 1946 में आगरा विश्वविद्यालय से डी. लिट् । शोध का विषय था-रीति काव्य की भूमिका तथा देव और उनकी कविताएँ। अध्यापन: 1937 में प्रारंभ किया। दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में अध्यक्ष पद से सेवा निवृत्ति के बाद वैज्ञानिक एवं तकनीकि शब्दावली आयोग के परामर्शदाता रहे। साहित्य सेवा : पहली पुस्तक 'वनमाला' काव्य संग्रह, बाद में समालोचना के क्षेत्र में प्रतिष्ठित। निबंधकार और आलोचक के रूप में प्रसिद्धि साहित्यशास्त्र में परंपरा और आधुनिकता जोड़नेवाले अप्रतिम साहित्यकार। 'रीतिकाव्य की भूमिका' पर साहित्य अकादमी पुरस्कार। 1983 में भारत सरकार ने 'पद्मभूषण' से अंलकृत किया। उ. प्र. हिन्दी संस्थान द्वारा भारत-भारती पुरस्कार प्रदान किया गया। 'अर्धकथा' आत्मकथा के अतिरिक्त डॉ. नगेन्द्र द्वारा रचित और संपादित पुस्तकों की संख्या एक शतक से कहीं अधिक। प्रमुख कृतियाँ : रीति काव्य की भूमिका, रस सिद्धांत, भारतीय काव्यशास्त्र की भूमिका, भारतीय सौंदर्य शास्त्र की भूमिका, साहित्य का समाजशास्त्र, हिन्दी साहित्य का बृहद् इतिहास, पाश्चात्य काव्यशास्त्र : सिद्धांत और वाद, भारतीय साहित्य और भारतीय समीक्षा आदि।

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