Jhadajhadati

Format:Paper Back

ISBN:978-93-5072-100-1

Author:VISHWAS PATIL

Pages:550

MRP:Rs.395/-

Stock:In Stock

Rs.395/-

Details

साहित्य अकादेमी पुरस्कार (मराठी,1992 ) से पुरस्कृति कृति-‘झाडाझडती’

Additional Information

झाडाझडती मराठी के यथार्थवादी उपन्यास की परम्परा में सर्वश्रेष्ठ उपन्यास होने से गोदान या मैला आँचल की अगली कड़ी के रूप में इसका स्वागत किया जा सकता है। झाडाझडती सात गाँवों के विस्थापितों के दर्दनाक हालातों की भयावह और भीषण त्रासदी है, जो एक ही साथ मनुष्य के स्वभाव सम्बन्धी कुछ चिरन्तन प्रश्न तल्खी से उठाकर पाठकों को अत्यधिक बेचैन कर देती है, इसके अलावा हमारे देश-परिवेश, समाज, राजनीति तथा संस्कृति के धरातल पर कतिपय अहम प्रश्नचिह्न लगा देती है। यह त्रासदी मध्यवर्गीय मनुष्य की सुखवादी प्रवृत्ति को झकझोरती है। हमारे समूचे सांस्कृति सोच और वांछित जीवन प्रणाली के सन्दर्भ में नये सिरे से विचार करने के लिए उकसाती है। बुलडोजरों के प्रहार से उजड़ती बस्तियाँ लेखक ने ख़ुद देखीं और बेरहम सत्ताधीशों की मदहोशी को चूर-चूर कर देने वाली, उनकी घिग्घी बाँध देने वाली समूची ताकत से साक्षात्कार भी उन्होंने किया। यह ताकत भी बाँध-पीड़ित ग्रामवासियों की उनकी आहों से, चीखों से, सिसकारियों से, चीत्कारों से निकली ऊर्जा का करिश्मा देखने वाले प्रत्यक्षदर्शी भी रह चुके हैं। इस पूरे उपन्यास में शोषक और शोषितों के बीच का द्वन्द्व उभरकर सामने आया है। अपनी जमीन. घर-परिवार, समाज, रिश्तेदारी, परिवेश से उखड़े-उजड़े बाँध-पीड़ित गरीबों का एक तबका मेहनत की रोटी का जुगाड़ भी नहीं कर पाता। जबकि दसरी ओर प्रगति और विकास के नाम पर पनप रहा नव धनाढ्य वर्ग सम्पन्न से सम्पन्नतर बनता जा रहा है। क्या यही है असली विकास? क्या यही है ग्रामोद्धार? क्या यही है हरित क्रान्ति? क्या यही हैं आधुनिक सभ्यता एवं औद्योगीकरण के मानदण्ड ? क्या यही हैं मानवीय सम्बन्धों के सरोकार? ये तथा ऐसे कई अन्य सवाल अनायास पाठकों के सामने उभारने का प्रयास है यह उपन्यास। -डॉ. चन्द्रकान्त बांदिवडेकर

About the writer

VISHWAS PATIL

VISHWAS PATIL पानीपत ऐतिहासिक उपन्यास के 1989 में मराठी में बहुचर्चित होने के साथ ही मराठी साहित्य के क्षितिज पर विश्वास पाटील का नाम पूरी तेजी से जगमगाने लगा। इस ऐतिहासिक उपन्यास ने पाठकों की लोकप्रियता की बुलन्दियों को देखते-ही-देखते छू लिया। अब तक मराठी में इस उपन्यास के दस संस्करण निकल चुके हैं और पच्चीस हजार प्रतियाँ हाथोंहाथ बेची गयी हैं। भाषा परिषद् पुरस्कार (कलकत्ता), प्रियदर्शिनी अकादमी पुरस्कार (मुम्बई), नाथ माधव पुरस्कार (गोवा) आदि इकत्तीस सम्मान इस उपन्यास को प्राप्त हो चुके हैं। इस दृष्टि से पानीपत किसी भी भाषा साहित्य में मील का पत्थर बन गया है। तत्पश्चात पांगिरा, झाडाझडती आदि उपन्यास लिखकर विश्वास पाटील ने पाठकों को झकझोरा। क्योंकि ऐतिहासिक रंजकता के वायवी धरातल से शुरू कर घोर यथार्थ एवं सूक्ष्मातिसूक्ष्म मानवीय सम्बन्धों के धरातल के रू-ब-रू ला खड़ा करने में वे पूर्णतया सफल हो गये हैं। तेजी से बदलते जा रहे ग्राम जीवन का सार्थक आलेख पांगिरा में है तो झाडाझडती औद्योगिक विकास क्रम में सहायक विशाल बाँध परियोजनाओं का शिकार बने मायूस किन्तु जीवट विस्थापितों की व्यथा-कथा का मुखर स्वर है। श्री पाटील झाडाझडती को 1992 में साहित्य 'अकादेमी पुरस्कार जैसा अतिविशिष्ट सम्मान तो प्राप्त हुआ ही, इसके अलावा अन्य बाईस पुरस्कार-सम्मान भी मिले। पाँच संस्करणों में इस उपन्यास की ग्यारह हजार प्रतियाँ इस बीच सुधी पाठकों तक पहुँच चुकी हैं। श्री पाटील लम्बे समय से सरकारी सेवा में रहे हैं। इन्होंने स्वतन्त्रता आन्दोलन एवं द्वितीय विश्वयुद्ध की पृष्ठभूमि में नेताजी सुभाषचन्द्र के जीवन पर आधारित एक वृहत् 'उपन्यास महानायक की रचना की है। उनके सभी उपन्यास हिन्दी में उपलब्ध हैं।

Customer Reviews

No review available. Add your review. You can be the first.

Write Your Own Review

How do you rate this product? *

           
Price
Value
Quality