SHIKANJE KA DARD

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5000-719-8

Author:SUSHILA TAKBHORE

Pages:302


MRP : Rs. 495/-

Stock:In Stock

Rs. 495/-

Details

शिकंजे का दर्द

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शिकंजा यानी पंजा, जिसकी जकड़न में रहकर कुछ कर पाना कठिन हो। शिकंजा यानी कठपरा जिसमें कैद होकर उसके बाहर जाना कठिन हो। शब्दकोश में दिए अर्थ के अनुसार शिकंजे का अर्थ दबाने, कसने का यंत्र है। शिकंजे का अर्थ एक प्रकार का प्राचीन यंत्र है जिसमें अपराधी की टॉग कस दी जाती है। शिकंजा वह यंत्र है जिसमें धुनकने के पहले रुई को कसा जाता है। शिकंजे का अर्थ कोल्हू भी है। जिस तरह किसी ताकतवर को शिकंजे में जकड़कर उसकी पूरी ताकत को नगण्य बना दिया जाता है, उसी तरह मुझे भी सामाजिक जीवन की मनुवादी विषमता ने, वर्णवादी-जातिवादी समाज व्यवस्था ने शिकंजे में जकड़कर रखा, जिसका परिणाम पीड़ा-दर्द, छटपटाहट के सिवा कुछ नहीं है। सदियों के मूक मानव अब बोलने लगे हैं, अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने लगे हैं, प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ते हुए अपनी व्यथा-कथा लिखने लगे हैं। फिर भी, क्या प्रत्येक दलित पीड़ित को उसके मानवाधिकार मिल सके? अभी भी दलित शोषण की घटनाएँ क्या नहीं घटती हैं? विषमतावादी भारतीय समाज में जातिभेद, ऊंच-नीच की भावनाएँ क्या अब नहीं हैं? 'शिकंजे का दर्द' में संताप है दलित होने का, स्त्री होने का। इसमें शोषित, पीड़ित, अपमानित, अभावग्रस्त दलित जीवन की व्यथा है। स्त्री होना ही जैसे व्यथा की बात है। चाहे हमारा देश हो या विश्व के अन्य देश, हर जगह शोषण उत्पीड़न का शिकार स्त्री ही रही है। जिस देश में वर्णभेद, जातिभेद की कलुषित परम्पराएं हैं वहाँ दलित स्त्री शोषण की व्यथा और भी गहरी हो जाती है। सदियों से तिरस्कृत और अभावग्रस्त परिस्थितियों में रहने के लिए मजबूर किये गये दलित जीवन की व्यथा-कथा का दर्द 'शिकंजे के दर्द में समाहित है। 'शिकंजे का दर्द लिखने का उद्देश्य दर्द देने वाले शिकंजे को तोड़ने का प्रयास है।

About the writer

SUSHILA TAKBHORE

SUSHILA TAKBHORE सुशीला टाकभौरे जन्म : 4 मार्च 1954, बानापुरा (सिवनी मालवा), ज़िला-होशंगाबाद (म.प्र.)। शिक्षा : एम.ए. (हिन्दी साहित्य), एम.ए. (अम्बेडकर विचारधारा), बी.एड. पीएच.डी. (हिन्दी साहित्य)। प्रकाशित कृतियाँ : स्वाति बूँद और खारे मोती, यह तुम भी जानो, तुमने उसे कब पहचाना (काव्य संग्रह); हिन्दी साहित्य के इतिहास में नारी, भारतीय नारी : समाज और साहित्य के ऐतिहासिक सन्दर्भो में (विवरण); टूटता वहम, अनुभूति के घेरे, संघर्ष,ज़रा समझो (कहानी संग्रह); हमारे हिस्से का सूरज (कविता संग्रह); रंग और व्यंग्य (नाटक संग्रह); नंगा सत्य (नाटक); शिकंजे का दर्द (आत्मकथा); हाशिए का विमर्श (लेख संग्रह) नीला आकाश, तुम्हें बदलना ही होगा (उपन्यास); मेरे साक्षात्कार, दलित साहित्यः एक आलोचना दृष्टि, दलित लेखन में स्त्री चेतना की दस्तक (समीक्षा) कैदी नं. 307 सुधीर के पत्र, संवादों के सफ़र (पत्र संचयन)। साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं में सृजनात्मक गतिविधियाँ, दलित समाज और नारी की स्थिति पर परिवर्तनवादी आन्दोलन में वैचारिक सक्रियता, आकाशवाणी से समय-समय पर परिचर्चाएँ प्रसारित, म.प्र. के मुख्यमन्त्री श्री दिग्विजय सिंह के हाथ से 'म.प्र. दलित साहित्य अकादमी विशिष्ट सेवा सम्मान' एवं पुरस्कार 10000/-, रमणिका फ़ाउण्डेशन से 'सावित्री बाई फुले' सम्मान एवं पुरस्कार 11000/-, महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादमी' की ओर से डॉ. उषा मेहता हिन्दी सेवा सम्मान एवं पुरस्कार 51000/-। सम्पर्क : शील-2, गोपालनगर, तीसरा बस स्टॉप, नागपुर-22, महाराष्ट्र। मोबाइल : 09422548822, 0712-2230444 |

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