VE DEVTA NAHIN HEN

Format:Hard Bound

ISBN:978-81-7055-733-3

Author:ED. RAJENDRA YADAV

Pages:216

MRP:Rs.550/-

Stock:In Stock

Rs.550/-

Details

वे देवता नहीं हैं...

Additional Information

'वे देवता नहीं हैं...' है तो वरिष्ठ कथाकार राजेन्द्र यादव द्वारा लिखे गये समकालीनों के संस्मरण और विश्लेषण की किताब, जिसमें रामविलास शर्मा, अज्ञेय, यशपाल, मोहन राकेश, कमलेश्वर, मनमोहन ठाकौर, नजीर अकबराबादी, शानी, धर्मवीर भारती, भैरवप्रसाद गुप्त, मीरा महादेवन, शैलेश मटियानी, नरेशचन्द्र चतुर्वेदी, निर्मला जैन, लक्ष्मीचन्द्र जैन, भंवरमल सिंघी और स्वयं राजेन्द्र यादव पर राजेन्द्र यादव का संस्मरण और विश्लेषण शामिल है। अन्त में राजेन्द्र यादव पर अश्क का संस्मरण और राजेन्द्र यादव बनाम अश्क पत्राचार भी। लेकिन संस्मरणकार और विश्लेषणकार राजेन्द्र यादव का कहना कि-अचानक ख़याल आया कि अगर कानूनी रूप से अग्रिम जमानत ली जा सकती है तो अग्रिम श्रद्धांजलि क्यों नहीं लिखी जा सकती? आज ज़िन्दा बने रहना भी तो अपराध ही है। मरने के बाद लोग दिवंगत के बारे में पता नहीं क्या-क्या लिखते और बोलते हैं, वह बेचारा न उस सबका प्रतिवाद कर सकता है, न उसमें कुछ घटा-बढ़ा सकता है। दरअसल मेरे ये संस्मरण उसी लाचार आदमी के प्रतिवाद हैं। माध्यम मैं हूँ, मगर गुहार उस असहाय की है जो बलात्कार के खिलाफ़ न्याय की माँग कर रहा है। सचमुच यह कितना बड़ा राक्षसी षड्यन्त्र है कि हम धो-पोंछकर, काट-छील कर हर किसी को एक ही साँचे में घोंट-पीस डालते हैं कि उसकी सारी ‘अद्वितीयता' समाप्त हो जाती है। सब एक-दूसरे के प्रतिरूप देवता बने काँच के बक्सों से हमें घूरते रहते हैं। 'औरों के बहाने' के साथ 'वे देवता नहीं हैं...' मिलाकर पढ़ने से राजेन्द्र यादव के जीवन का काफी हिस्सा जाना जा सकता है। राजेन्द्र जी का कहना है कि उनके द्वारा लिखे संस्मरण, कहानियाँ-उपन्यास सब मिलाकर मेरी ही आत्मकथा के टुकड़े हैं।

About the writer

ED. RAJENDRA YADAV

ED. RAJENDRA YADAV राजेन्द्र यादव जन्म : 28 अगस्त, 1929 शिक्षा : एम.ए. (आगरा)। प्रथम रचना : प्रतिहिंसा ('चांद' के भूतपूर्व सम्पादक श्री रामरखसिंह सहगल के मासिक 'कर्मयोगी' में) 1947 में। प्रकाशित रचनाएँ : सारा आकाश, उखड़े हुए लोग, शह और मात, एक इंच मुस्कान (मन्नू भंडारी के साथ), कुलटा, अनदेखे अनजाने पुल, मंत्रविद्ध (उपन्यास) देवताओं की मूर्तियाँ, खेल-खिलौने, जहाँ लक्ष्मी कैद है, छोटे-छोटे ताजमहल, किनारे से किनारे तक, टूटना, ढोल और अपने पार, वहाँ तक पहुँचने की दौड़, श्रेष्ठ कहानियाँ, प्रिय कहानियाँ, प्रतिनिधि कहानियाँ, प्रेम कहानियाँ, दस प्रतिनिधि कहानियाँ और चौखटे तोड़ते त्रिकोण। (अब तक की तमाम कहानियाँ पड़ाव-1, पड़ाव-2 और 'यहाँ तक' शीर्षक तीन जिल्दों में संकलित) (कहानी संग्रह), आवाज़ तेरी है (कविता संग्रह) कहानी : स्वरूप और संवेदना, उपन्यास : स्वरूप और संवेदना, कहानी : अनुभव और अभिव्यक्ति, औरों के बहाने, अठारह उपन्यास, कांटे की बात शृंखला (निबन्ध संग्रह)। 'सम्पादन : नये साहित्यकार पुस्तकमाला में मोहन राकेश, कमलेश्वर, राजेन्द्र यादव, फणीश्वरनाथ रेणु तथा मन्नू भंडारी की चुनी हुई कहानियाँ। एक दुनिया : समानान्तर, कथा-यात्रा, कथा-दशक, आत्मतर्पण और काली सुखियाँ (अफ्रीकी कहानियाँ)। 'अनुवाद : हमारे युग का एक नायक : लर्मेल्तोव, प्रथम प्रेम, 'वसंत प्लावन : तुर्गनेव, टक्कर : ऐन्तोन चेखव, संत 'सर्गीयस : टालस्टॉय, एक महुआ : एक मोती : स्टाइन बैक, 'अजनबी : अलबेयर कामू (छहों उपन्यास कथा-शिखर-1,2 शीर्षक से दो जिल्दों में संकलित)। निधन : 28 अक्टूबर 2013

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