JAWAB DO VIKRAMADITYA

Format:Hard Bound

ISBN:81-8143-088-3

Author:ED. RAJENDRA YADAV

Pages:

MRP:Rs.300/-

Stock:In Stock

Rs.300/-

Details

जवाब दो विक्रमादित्य

Additional Information

राजेन्द्र जी के सम्पादकीयों की तरह ही साक्षात्कार भी उसकी प्रतिबद्धताओं, पक्षधरताओं, चिंतन की बारीकियों को हमारे सामने लाते हैं, इन साक्षात्कारों के द्वारा जहाँ हम उनके व्यक्तित्व की संपूर्ण रेखाओं, उतार-चढ़ावों को समझ सकते हैं, वहीं व्यक्तिगत ज़िन्दगी की चंद अंतरंग कतरनें भी अपना चेहरा झलका जाती हैं। चर्चित साक्षात्कार 'यह अंत मेरा नहीं...' (ओमा शमा) के विवाद में बने रहने का एकमात्र कारण यह 'अंतरंग' ही थी, जिसको लेकर उत्साही पाठक उड़ चले थे और सबका उसे पचा पाना मुश्किल हो गया था। लगभग साल-भर साहित्यिक पत्रिकाओं/ पत्रों में बहस का केन्द्र बने रहने वाले इस इण्टरव्यू के कई गम्भीर मुद्दे... कुछ मार्मिक प्रसंग इसी सस्ती, कहीं-नहीं प्रतिशोधी बहसबाज़ी और सनसनी की भेंट चढ़ गये। ईमानदारी और आत्मविश्लेषण की वह जबर्दस्त उपस्थिति, आक्षेपबाज़ी के धूल-धक्कड़ में राजेन्द्र जी द्वारा सिर्फ अपना पक्ष रखने में विश्वास करने के साहस, बौद्धिक साहित्यिक विरासत की चिन्ता, अपनी गलती को निस्संकोच स्वीकारने और उत्तेजना भी अब इतनी ठण्डी कर दी है कि समग्र परिप्रेक्ष्य में और ईमानदारी से इसे जाँचा जा सके। इसीलिए मन्नू जी, अर्चना जी, निर्मला जैन आदि की महत्त्वपूर्ण प्रतिक्रियाएँ (और कुछ पाठकीय प्रतिक्रियाएँ भी) यहाँ दी जा रही हैं, ताकि इसे एक सम्पूर्ण बहस की छवि दी जा सके।

About the writer

ED. RAJENDRA YADAV

ED. RAJENDRA YADAV राजेन्द्र यादव जन्म : 28 अगस्त, 1929 शिक्षा : एम.ए. (आगरा)। प्रथम रचना : प्रतिहिंसा ('चांद' के भूतपूर्व सम्पादक श्री रामरखसिंह सहगल के मासिक 'कर्मयोगी' में) 1947 में। प्रकाशित रचनाएँ : सारा आकाश, उखड़े हुए लोग, शह और मात, एक इंच मुस्कान (मन्नू भंडारी के साथ), कुलटा, अनदेखे अनजाने पुल, मंत्रविद्ध (उपन्यास) देवताओं की मूर्तियाँ, खेल-खिलौने, जहाँ लक्ष्मी कैद है, छोटे-छोटे ताजमहल, किनारे से किनारे तक, टूटना, ढोल और अपने पार, वहाँ तक पहुँचने की दौड़, श्रेष्ठ कहानियाँ, प्रिय कहानियाँ, प्रतिनिधि कहानियाँ, प्रेम कहानियाँ, दस प्रतिनिधि कहानियाँ और चौखटे तोड़ते त्रिकोण। (अब तक की तमाम कहानियाँ पड़ाव-1, पड़ाव-2 और 'यहाँ तक' शीर्षक तीन जिल्दों में संकलित) (कहानी संग्रह), आवाज़ तेरी है (कविता संग्रह) कहानी : स्वरूप और संवेदना, उपन्यास : स्वरूप और संवेदना, कहानी : अनुभव और अभिव्यक्ति, औरों के बहाने, अठारह उपन्यास, कांटे की बात शृंखला (निबन्ध संग्रह)। 'सम्पादन : नये साहित्यकार पुस्तकमाला में मोहन राकेश, कमलेश्वर, राजेन्द्र यादव, फणीश्वरनाथ रेणु तथा मन्नू भंडारी की चुनी हुई कहानियाँ। एक दुनिया : समानान्तर, कथा-यात्रा, कथा-दशक, आत्मतर्पण और काली सुखियाँ (अफ्रीकी कहानियाँ)। 'अनुवाद : हमारे युग का एक नायक : लर्मेल्तोव, प्रथम प्रेम, 'वसंत प्लावन : तुर्गनेव, टक्कर : ऐन्तोन चेखव, संत 'सर्गीयस : टालस्टॉय, एक महुआ : एक मोती : स्टाइन बैक, 'अजनबी : अलबेयर कामू (छहों उपन्यास कथा-शिखर-1,2 शीर्षक से दो जिल्दों में संकलित)। निधन : 28 अक्टूबर 2013

Customer Reviews

No review available. Add your review. You can be the first.

Write Your Own Review

How do you rate this product? *

           
Price
Value
Quality