CHHANGYA RUKKH

Format:Hard Bound

ISBN:978-81-8143-645-0

Author:Balbir Madhopuri Translation : Subhash Neerav

Pages:232

MRP:Rs.300/-

Stock:In Stock

Rs.300/-

Details

छांग्या रुक्ख

Additional Information

यह आत्मकथा-आत्मश्लाघा और बड़बोलेपन की सरहदों से बहुत दूर खड़ी दिखाई देती है। लेखक ने अपनी स्थितियों और परिस्थितियों के भौतिक और मानसिक यथार्थ को सादगी से व्यक्त किया है। आत्मकथा का पूरा कलेवर (भाषा, शिल्प, रचना-दृष्टि और काल) अपने समकालीन साहित्य की चुनौतियों को पूरी ईमानदारी के साथ सामने रखता है। वह समाज की बेहतरी के लिए बड़े सवाल भी खड़े करता है। वह अपने वक्त के घिनौनेपन से भयाक्रांत जरूर है, पर एक धैर्य भी है, जो उसे जीवन के हर मोड़ पर सँभलने की शक्ति देता है। सामाजिक समाधान में इसकी भूमिका उस गवाह की तरह है, जो जाति-पाँति और छूआछूत व सामाजिक असमानता के ठेकेदारों को कठघरे में खड़ा करके अपना हलफ़िया बयान दर्ज़ कराता है। इतना ही नहीं, लेखक ने 'छांग्या रुक्ख' में अपने शोषित और पीड़ित जीवन को पूरे साहित्यिक मानदंडों के साथ व्यक्त कर, सांस्कृतिक धरातल पर उस भाव-बोध का भी अहसास कराया है, जिसे कबीर और नानक ने अपनी साखियों और पदों के जरिये सबसे दुखी इंसान की आत्मा के रूप में दर्शन किए थे। मुझे विश्वास है कि 'छांग्या रुक्ख' का साहित्य की महत्त्वपूर्ण कृति के रूप में निश्चय ही सम्मान और स्वागत होगा और यह कृति मात्र पंजाबी या हिंदी तक सीमित नहीं रहेगी। - कमलेश्वर

About the writer

Balbir Madhopuri Translation : Subhash Neerav

Balbir Madhopuri Translation : Subhash Neerav बलबीर माधोपुरी बलबीर माधोपुरी का पंजाबी समकालीन साहित्य में अनुपम स्थान है। इसलिए कि उन्होंने दलित चेतना और संवेदना के माध्यम से अपनी एक स्वतंत्र पहचान बनायी है। इनकी सात मौलिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। जिनमें दो काव्य संग्रह और पाँच गद्य संग्रह हैं। इनके संदर्भ में उल्लेखनीय बात यह है कि इन्होंने पंजाबी साहित्य अपनी विलक्षण शैली और पृथक रचना कौशल से पाठकों को न केवल अपनी ओर आकर्षित किया है बल्कि उनकी अनुभूतियों को भी गहरे तक छआ। भी है। साहित्यिक क्षेत्र में ऐसा यदाकदा ही घटित होता है। हिन्दी साहित्य जगत में बलबीर का परिचय उनके द्वारा रचित पंजाबी पुस्तकों के हिन्दी अनुवादों के द्वारा पहले ही हो चुका है। इन्हें सरकारी और गैर-सरकारी अनेक पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। जुलाई 1955 को पंजाब के जिला जालंधर के। गांव माधोपुर में जन्मे बलबीर माधोपुरी पेशे से पत्रकार हैं। इन्होंने अब तक बीस से अधिक पुस्तकों का पंजाबी अनुवाद किया है और इतनी पुस्तकों का संपादन भी किया है। अपने साहित्यिक सुजन के बलबूते और अजीत कौर के सहयोग से इन्होंने नेपाल और पाकिस्तान में हुए सार्क लेखक सम्मेलन में भाग लिया। आत्मकथा छांग्या रुक्ख ने बलबीर की सजन प्रक्रिया को शिखर तक पहुँचाया है। प्रस्तुत पुस्तक कई भारतीय भाषाओं सहित अंग्रेजी में। आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस से शीघ्र ही प्रकाश्य है। संपर्क:- आर. जेड ए-44, महावीर विहार, पालम, नई दिल्ली-1100451

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