Uttar-Aadhuniktavad Aur Dalit Sahitya

Format:Hard Bound

ISBN:978-81-8143-725-9

Author:ED. Dr. KRISHNA DUTT PALIWAL

Pages:


MRP : Rs. 695/-

Stock:In Stock

Rs. 695/-

Details

उत्तर-आधुनिकतावाद और दलित साहित्य

Additional Information

उत्तर-आधुनिक परिदृश्य में दलित-साहित्य ने एक तरह से क्रान्तिकारी विचार-प्रवाह की निष्पत्ति की है। पिछड़े, अति पिछड़े, वंचितों, उपेक्षितों, परिधि पर यातना भोगते विशाल जन-समाज को इस साहित्य ने शब्द और कर्म के समाजशास्त्र की ओर प्रवृत्त किया है। भारत में उत्तरआधुनिक मनोदशा के दो प्रबल चिन्तक हैं-अम्बेडकर और गाँधी। अम्बेडकर का लम्बा प्रबन्धात्मक लेख 'भारत में जाति प्रथा : संरचना, उत्पत्ति और विकास' तथा गाँधी का 'हिन्द-स्वराज्य' चिन्तन उत्तरआधुनिकता के पहले ऐतिहासिक दस्तावेज़ हैं। पश्चिमी सभ्यता संस्कृति की ‘आधुनिकता' को दोनों चिन्तकों ने अस्वीकार करते हुए 'स्थानीयता' की ज़ोरदार वकालत की है। दलित, अतिदलित का उत्तर आधुनिकतावादी 'पाठ' अब 'मूल्यांकनपरक विमर्श' बन चला है। हिन्दी साहित्य में दलित साहित्य की व्याख्याओं का यह नया 'पाठ' विखण्डनवादी पाठ-प्रविधियों से पुरानी समीक्षा को पीछे धकेल सका है। आज 'उत्तर-आधुनिकता' एक विश्व-स्थिति है, इससे हम बच नहीं सकते। कृष्णदत्त पालीवाल ने उत्तर-आधुनिकतावादी और उत्तर-संरचनावादी-विमर्शों की हिन्दी में अगुआई की है। इन विमर्शों को साहित्याध्ययनों में, सभा गोष्ठियों में आज वरीयता प्राप्त है। कृष्णदत्त पालीवाल की यह पुस्तक जागरूक पाठकों के लिए प्रतिनिधित्वरहित की ‘उपस्थिति' है। इस 'अनुपस्थिति' की उपस्थिति में चिन्तन की बहु केन्द्रीय अवस्था का प्रबल स्वर है।

About the writer

ED. Dr. KRISHNA DUTT PALIWAL

ED. Dr. KRISHNA DUTT PALIWAL जन्म : 4 मार्च, 1943 को सिकंदरपुर, जिला फर्रुखाबाद (उ.प्र.) में। प्रकाशन : भवानी प्रसाद मिश्र का काव्य-संसार, आचार्य रामचंद्र शुक्ल का चिंतन जगत्, मैथिलीशरण गुप्‍त : प्रासंगिकता के अंत:सूत्र, सुमित्रानंदन पंत, डॉ. अंबेडकर और समाज-व्यवस्था, सीय राम मय सब जग जानी, सर्वेश्‍वरदयाल सक्सेना, हिंदी आलोचना के नए वैचारिक सरोकार, गिरिजा कुमार माथुर, जापान में कुछ दिन, डॉ. अंबेडकर : समाज-व्यवस्था और दलित-साहित्य, उत्तर आधुनिकता की ओर, अज्ञेय होने का अर्थ, उत्तर-आधुनिकतावाद और दलित साहित्य, नवजागरण और महादेवी वर्मा का रचनाकर्म : स्त्री-विमर्श के स्वर, अज्ञेय : कवि कर्म का संकट, निर्मल वर्मा (विनिबंध) दलित साहित्य : बुनियादी सरोकार, निर्मल वर्मा : उत्तर औपनिवेशिक विमर्श। लक्ष्मीकांत वर्मा की चुनी हुई रचनाएँ, मैथिलीशरण गुप्‍त ग्रंथावली का संपादन। पुरस्कार/सम्मान : हिंदी अकादमी पुरस्कार, दिल्ली हिंदी साहित्य सम्मेलन सम्मान, तोक्यो विदेशी अध्ययन विश्वविद्यालय, जापान द्वारा प्रशस्ति-पत्र, राममनोहर लोहिया अतिविशिष्‍ट सम्मान, सुब्रह्मण्यम भारती सम्मान, साहित्यकार सम्मान, विश्‍व हिंदी सम्मान, विश्‍व हिंदी सम्मेलन, न्यूयॉर्क में सम्मानित। दिल्ली विश्‍वविद्यालय के हिंदी विभाग में प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष रहे तथा तोक्यो यूनिवर्सिटी ऑफ फॉरेन स्टडीज में विजिटिंग प्रोफेसर।

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