PARAMPARAGAT VARN-VYAVSHTHA AUR DALIT SAHITYA

Format:Hard Bound

ISBN:978-81-8143-944-4

Author:SAXANT MASKE

Pages:


MRP : Rs. 150/-

Stock:In Stock

Rs. 150/-

Details

परम्परागत वर्ण व्यवस्था और दलित साहित्य

Additional Information

भारतीय समाज के मूल में आदिकाल से द्वन्द्व रहे हैं, जो विभिन्न अवसरों पर उभरते रहे हैं। परम्पराएँ आसानी से ख़त्म नहीं होतीं। उनके भीतर समय-समय पर कुछ बदलाव आता है। यह पुस्तक ऐसे ही बदलाव का दस्तावेज़ है। दलित साहित्य में किस प्रकार का बदलाव आया है, यह इस पुस्तक में प्रस्तुत किया गया है। वर्ण-व्यवस्था के ख़िलाफ़ और सवर्णों की दोहरी मानसिकता को उजागर किया है, वहीं दलितों के भीतर उभरे क्रान्ति के आक्रोश को इस पुस्तक के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। यह पुस्तक इसलिए भी महत्वपूर्ण कहा जायेगी कि इसमें पाठक पीढ़ियों के अन्तराल के साथ राजनीतिज्ञों, धर्म पुराणों तथा प्रशासकों के परस्पर टकराव तथा द्वेष से भी रू-ब-रू होंगे।

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