GURU RAVIDAS : VANI EVAM MAHATVA

Format:Hard Bound

ISBN:81-8143-059-X

Author:MEERA GAUTAM

Pages:424


MRP : Rs. 795/-

Stock:Out of Stock

Rs. 795/-

Details

कविता का आधार सम्पूर्ण जीवन की सम्पूर्णता बहुरूपमयी विविधता में है। कविता जो जीवन-संस्कृति का महत्त्वपूर्ण घटक है भी, समय की कृत्रिम शिष्टताओं से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकी है। लेकिन जब-जब उसने कृत्रिम आचार-व्यवहारों के नाज-नखरों से खुद को सजाने-सँवारने की रीति अपनायी है, तब-तब लोक सहज व्यवहार और निष्कपट ऊँचाई ने अवरोधों को हटाया है। हिन्दी कविता का उदाहरण ही लें तो रविदास, कबीर, जायसी, सूर, तुलसी की लोक-चेतना ने समाज को उबारा है। रीतिकाल की कविता के रीतिबद्ध होने का एकमात्र कारण लोक के यथार्थ से उनका कट जाना है। भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने रीतिबद्धता का विरोध करते हुए कविता को पुनः लोक-सम्बन्द्धता प्रदान की। निराला ने उसे शास्त्र के चक्रव्यूह से निकालकर लोक-गरिमा दी। स्पष्ट है कि हिन्दी कविता की मूलधारा लोक-प्रवृत्ति से समन्वित है।

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About the writer

MEERA GAUTAM

MEERA GAUTAM शिक्षा बिज़नेस मॅनेजमेंट की लेकिन मानस एक साहित्यिक लेखक का - हरीश भिमानी आवाज़ की दुनिया में आये विज्ञापनों के जरिये और टी.वी. सीरियल महाभारत में ‘समय’, भगवतगीता, गायत्री को स्वर देकर घर-घर में जानी-पहचानी आवाज़ बन गये। और वही आवाज़ उन्हें ले गयी दुनिया-भर के देशों में अनेक जानेमाने भारतीय कलाकारों के कार्यक्रमों का संचालन करने।

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