GANIT KE KHEL

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5000-722-8

Author:YA.F.PERESAMAAN

Pages:160

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MRP : Rs. 300/- Rs. 225/-

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Details

‘गणित’ और ‘खेल’! सामान्यतया इन दोनों शब्दों को परस्पर विरोधी माना जाता है। गणित एक ऐसा विषय, जो बहुतों के हाथ-पैर दुखा दे। उसमें या उसके माध्यम से खेल या मनोरंजन की कल्पना करना सामान्य सोच वाले लोगों की बात नहीं। लेकिन यह सच है, कि ऊपर से रूखा और मत्थापच्ची वाला विषय नज़र आने के बावजूद, अगर उसमें रमा जा सके, उससे घबराने की बजाय उसे ‘इन्ज्वाय’ करने की मानसिकता अपने में विकसित की जा सके, तो गणित बहुत रोचक, सरस और मनोरंजनकारी विषय नजर आने लगेगा। पश्चिमी देशों में अंग्रेजों की ऐसी अनेक पुस्तकें हैं, जिनमें गणित के ‘पज़ल्स’ (पहेलियाँ) हैं, और जिनके जरिये लाखों-करोड़ों बच्चे और दूसरे लोग भरपूर मनोरंजन करते हैं। हमारे लोकजीवन में भी गणित से सम्बन्धित बहुत ही रोचक और मनोरंजक पहेलियाँ प्रचलित रही हैं। एक पहेली है: ‘अस्सी मन का लड़का/उस पर बैठा एक मकड़ा/रत्ती-रत्ती खाये, तो कितने दिनों में खाये?’

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