BHARTIYA KAVYA MEIN SARVDHARMA SAMBHAV

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ISBN:81-7055-808-5

Author:DR. NAGENDRA

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MRP:Rs.325/-

Stock:In Stock

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सामान्यत: तो प्रत्येक युग में सामाजिक-राजनीतिक जीवन की सुख-शांति के लिए सर्वधर्म समभाव की संकल्पना अत्यंत महत्त्वपूर्ण रही है, परंतु हमारे देश के संविधान की भूमिका में भारत के लिए प्रयुक्त ‘सेक्यूलर स्टेट’ पद के साथ संपृक्त हो जाने के कारण यह विशेष चर्चा का विषय बन गयी है। स्वतंत्र भारत के भाग्यविधाताओें का यह पवित्र संकल्प था कि यहां किसी भी प्रकार के जातीय-प्रजातीय तथा सांप्रदायिक भेदभाव के लिए स्थान नहीं होना चाहिए-और प्रत्येक नागरिक को अपनी धार्मिक मान्यताओं तथा नीति-नियमों का अनुपालन करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। चूंकि मूल संविधान का आलेखन अंग्रेजी भाषा में हुआ था, अतः उसके निर्माताओं ने पाश्चात्य लोकतंत्र आदि के प्रलेखों से खोज कर ‘सेक्यूलर’ शब्द का प्रयोग किया।

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DR. NAGENDRA

DR. NAGENDRA डॉ. नगेन्द्र जन्म : 22 मार्च, 1915 को जिला अलीगढ़ (उ.प्र) के अतरौली कस्बे में। शिक्षा : 1946 में आगरा विश्वविद्यालय से डी. लिट् । शोध का विषय था-रीति काव्य की भूमिका तथा देव और उनकी कविताएँ। अध्यापन: 1937 में प्रारंभ किया। दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में अध्यक्ष पद से सेवा निवृत्ति के बाद वैज्ञानिक एवं तकनीकि शब्दावली आयोग के परामर्शदाता रहे। साहित्य सेवा : पहली पुस्तक 'वनमाला' काव्य संग्रह, बाद में समालोचना के क्षेत्र में प्रतिष्ठित। निबंधकार और आलोचक के रूप में प्रसिद्धि साहित्यशास्त्र में परंपरा और आधुनिकता जोड़नेवाले अप्रतिम साहित्यकार। 'रीतिकाव्य की भूमिका' पर साहित्य अकादमी पुरस्कार। 1983 में भारत सरकार ने 'पद्मभूषण' से अंलकृत किया। उ. प्र. हिन्दी संस्थान द्वारा भारत-भारती पुरस्कार प्रदान किया गया। 'अर्धकथा' आत्मकथा के अतिरिक्त डॉ. नगेन्द्र द्वारा रचित और संपादित पुस्तकों की संख्या एक शतक से कहीं अधिक। प्रमुख कृतियाँ : रीति काव्य की भूमिका, रस सिद्धांत, भारतीय काव्यशास्त्र की भूमिका, भारतीय सौंदर्य शास्त्र की भूमिका, साहित्य का समाजशास्त्र, हिन्दी साहित्य का बृहद् इतिहास, पाश्चात्य काव्यशास्त्र : सिद्धांत और वाद, भारतीय साहित्य और भारतीय समीक्षा आदि।

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