MAMTA KAALIYA KI KAHANIYAN-1

Format:Hard Bound

ISBN:81-8143-300-9

Author:MAMTA KALIA

Pages:392


MRP : Rs. 695/-

Stock:In Stock

Rs. 695/-

Details

ममता कालिया की कहानियॉ भाग-1

Additional Information

एक तारीख़, 'राएवाली' वैसी कहानियां हैं जैसी ज़िन्दगी है, तुर्श और शीरी, सम और विषम। ममता कालिया की कहानियों में जिस संवेदनशील, संतुलित, समझदार लेकिन चुलबुले, मानवीय सहानुभूति से आलोकित व्यक्तित्व की झलक मिलती है वह उनके दृष्टिकोण की मौलिकता से दुगनी दमक पाती है। उनकी रचनाओं में कलावादी कसीदाकारी न होकर जीवनवादी यथार्थ का सौन्दर्यबोध है। इस रचनाकार ने अपने समय और समाज को पुनर्परिभाषित करने का सृजनात्मक जोखिम लगभग हर कहानी में उठाया है। कभी वे समूचे परिवेश में नया सरोकार ढूँढती हैं तो कभी वे वर्तमान परिवेश में नयी नारी की अस्मिता और संघर्ष को शब्द देती हैं। प्रस्तुत कहानियों का रचनाकाल 1965 से 1985 रहा है। ये हिन्दी कहानी में प्रयोगधर्मिता के उत्कर्ष-वर्ष रहे हैं। ममता कालिया की कलम पर इनका प्रभाव देखा जा सकता है। समकालीन कथा-परिदृश्य में जिस नारी-विमर्श का शोर सुनाई दे रहा है, उसका मौलिक स्वरूप व सरोकार इन कहानियों में अपनी समर्थ उपस्थिति बनाये हुए है। जब ये कहानियाँ लिखी गई तब नारी-विमर्श न तो बिकाऊ माल था न चालू नुस्खा। लेकिन ममता कालिया ने बहुत पहले यह देख लिया था कि स्त्री के जीवन में अधिकार का संघर्ष सतत चलने वाला क्रम है। अपने सोच एवं विचार में यह रचनाकार पूर्ण तथा आधुनिक और निषेध-मुक्त है।

About the writer

MAMTA KALIA

MAMTA KALIA "ममता कालिया कई शहरों में रहने, पढ़ने और पढ़ाने के बाद अब ममता कालिया दिल्ली (एनसीआर) में रहकर अध्ययन और लेखन करती हैं। वे हिन्दी और इंग्लिश दोनों भाषाओं की रचनाकार हैं। भारतीय समाज की विशेषताओं और विषमताओं पर अपनी पैनी नज़र रखते हुए ममता कालिया की प्रत्येक रचना के केन्द्र में आज का समाज है। विकासशील समाज में बनते-बिगड़ते सम्बन्ध, प्रगति के आर्थिक, सामाजिक दबाव, स्त्री की प्रगति को देखकर पुरुष मनोविज्ञान की कुण्ठाएँ और कामकाजी स्त्री के संघर्ष उनके प्रिय विषय हैं। प्रकाशित पुस्तकों की संख्या विपुल होने के कारण यहाँ केवल उनकी प्रमुख प्रकाशित पुस्तकों का उल्लेख किया जा रहा है। ममता कालिया ने कविता, कहानी, उपन्यास, संस्मरण, नाटक, यात्रा- साहित्य और निबन्धों से हिन्दी साहित्य को समृद्ध किया है । प्रमुख उपन्यास: बेघर, नरक दर नरक, तीन लघु उपन्यास, दौड़, दुक्खम-सुक्खम, सपनों की होम डिलिवरी, कल्चर-वल्चर। प्रमुख कहानी संग्रह: छुटकारा, सीट नम्बर छह, उसका यौवन, एक अदद औरत, जाँच अभी जारी है, निर्मोही, मुखौटा, बोलने वाली औरत, थोड़ा सा प्रगतिशील, ख़ुशक़िस्मत। कविता संग्रह: । A Tribute to Papa and Other Poems (Writers Workshop), Poems 78 (Writers Workshop), खाँटी घरेलू औरत, पचास कविताएँ, कितने प्रश्न करूँ। संस्मरण: कल परसों के बरसों, कितने शहरों में कितनी बार। निबन्ध् संग्रह: भविष्य का स्त्री विमर्श, स्त्री विमर्श का यथार्थ। ममता कालिया ने अनेक कहानी संकलनों का सम्पादन किया है तथा 5 वर्ष महात्मा गाँधी हिन्दी अन्तरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय, वर्धा की इंग्लिश पत्रिका भ्पदकप की सम्पादक रही हैं। उन्हें मिले पुरस्कारों और सम्मानों की सूची में कुछ इस प्रकार हैं: सर्वश्रेष्ठ कहानी सम्मान हिन्दुस्तान टाइम्स, दिल्ली; यशपाल कथा सम्मान, साहित्य भूषण सम्मान, राम मनोहर लोहिया सम्मान (उ.प्र. हिन्दी संस्थान द्वारा); वनमाली सम्मान, वाग्देवि सम्मान, सीता स्मृति सम्मान, कमलेश्वर स्मृति सम्मान, के. के. बिड़ला न्यास का व्यास सम्मान। सम्प्रति वे एक उपन्यास और संस्मरणमाला पर कार्य कर रही हैं। पता: बी 3ए/303, सुशान्त एक्वापोलिस, ओपोजिट क्रासिंग्स रिपब्लिक, ग़ाज़ियाबाद-201009 ई-मेल: mamtakalia011@gmail.com "

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