SAFED BADSHAH

Original Book/Language: हंगेरियन भाषा से हिन्दी भाषा में अनूदित अनुवादक – इन्दु मज़लदान

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5000-185-1

Author:György Dragomán

Translation:युवा लेखक जॉर्ज द्रौगोमान द्वारा लिखा यह उपन्यास 'सफ़ेद बादशाह' (A Fcher Kiraly) जिसने न सिर्फ हंगरी में एक के बाद एक इनाम जीते बल्कि पूरे यूरोप और अमरीका के साहित्य प्रेमियों के हृदय पर छा गया। इसका अनुवाद अभी तक विश्व की करीब तीस भाषाओं में हो चुका है। फिनलैण्ड में तो इसके अनुवादक तक को पुरस्कृत किया गया है। कहानी एक ग्यारह साल के बच्चे के जीवन के कटु अनुभव उसी की ज़बानी बयान करती है। उसके पिता को अचानक एक दिन लेबरकैम्प में ले जाया जाता है, उसी की आँखों के सामने। कभी मज़ाक भरी, कभी दुखद घटनाओं से गुज़रती यह कहानी बिना कुछ कहे, तानाशाही शासन के आलम को हमारी आँखों के सामने ला कर खड़ा कर देती है। हालाँकि कहानी अस्सी के दशक के रोमानिया के बारे में है मगर ये घटनाएँ कहीं भी, कभी भी किसी भी तानाशाह के राज्य में घट सकती हैं। पर जो बात गौर करने योग्य है वह यह कि बच्चे अपने लिए हर परिस्थिति में कुछ खेलने को निकाल ही लेते हैं, वे जीवन को कभी नीरस नहीं बनने देते।

Pages:192


MRP : Rs. 350/-

Stock:In Stock

Rs. 350/-

Details

हंगेरियन भाषा से हिन्दी भाषा में अनूदित अनुवादक – इन्दु मज़लदान

Additional Information

युवा लेखक जॉर्ज द्रौगोमान द्वारा लिखा यह उपन्यास 'सफ़ेद बादशाह' (A Fcher Kiraly) जिसने न सिर्फ हंगरी में एक के बाद एक इनाम जीते बल्कि पूरे यूरोप और अमरीका के साहित्य प्रेमियों के हृदय पर छा गया। इसका अनुवाद अभी तक विश्व की करीब तीस भाषाओं में हो चुका है। फिनलैण्ड में तो इसके अनुवादक तक को पुरस्कृत किया गया है। कहानी एक ग्यारह साल के बच्चे के जीवन के कटु अनुभव उसी की ज़बानी बयान करती है। उसके पिता को अचानक एक दिन लेबरकैम्प में ले जाया जाता है, उसी की आँखों के सामने। कभी मज़ाक भरी, कभी दुखद घटनाओं से गुज़रती यह कहानी बिना कुछ कहे, तानाशाही शासन के आलम को हमारी आँखों के सामने ला कर खड़ा कर देती है। हालाँकि कहानी अस्सी के दशक के रोमानिया के बारे में है मगर ये घटनाएँ कहीं भी, कभी भी किसी भी तानाशाह के राज्य में घट सकती हैं। पर जो बात गौर करने योग्य है वह यह कि बच्चे अपने लिए हर परिस्थिति में कुछ खेलने को निकाल ही लेते हैं, वे जीवन को कभी नीरस नहीं बनने देते।

About the writer

György Dragomán

György Dragomán जॉर्ज द्रौगोमान का जन्म रोमानिया के मॉरोशवाशारहैय नामक स्थान पर 1973 में हुआ। सन् 1988 में, मात्र पन्द्रह वर्ष की आय में यह परिवार सहित हंगरी आकर बस गये। स्कूली शिक्षा हंगरी में 'सोमबॉतहैय' में हुई, उसके बाद बुदापैश्त में विश्वविद्यालय में दाखिला लिया। अंग्रेजी और फ़िलॉस्फी में एम.ए. करने के बाद वहीं पीएच.डी. की डिग्री हासिल की। उसी बीच इन्होंने अपना पहला उपन्यास (पुस्तिताश कन्यवै) अर्थात् 'विध्वंस की पुस्तक' लिखा जो 2002 में छपा और अपने पहले उपन्यास से ही यह हंगरी में बेहद लोकप्रिय हो गये। 2003 में इन्हें ब्रोदी पुरस्कार मिला, उसी वर्ष शरश पुरस्कार भी। 2005 में इनका उपन्यास (A Feber Kiraly) यानी 'सफ़ेद बादशाह' छपा, जिसके लिए इन्हें हंगरी के सभी साहित्यिक पुरस्कार मिले। अमरीका में 'टाइम्स' में इनका इण्टरव्यू छपा और करीब-करीब सभी यूरोपीय भाषाओं में इसका अनुवाद हुआ। जॉर्ज की पत्नी ऑन्ना. टी. सॉबो भी हंगरी की एक विख्यात कवयित्री हैं। उन्होंने भी हंगरी का कोई साहित्यिक पुरस्कार ऐसा नहीं है जो न पाया हो। इनके दोनों बच्चों का जन्म दोनों उपन्यासों के छपने के ही वर्षों में हुआ। पहला पुत्र 2002 में और दूसरा पुत्र 2005 में जन्मा। जॉर्ज लेखन के अतिरिक्त अनुवाद कार्य भी कर रहे हैं। शेक्सपियर, बैकैट, आदि के इनके अनुवाद भी काफ़ी लोकप्रिय हैं।

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