Saral Ganit : Jyamiti

Format:Hard Bound

ISBN:81-88599-15-8

Author:BRIJ MOHAN

Pages:100

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MRP : Rs. 150/- Rs. 113/-

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Details

भारत में ज्यामिति का आरम्भ शुल्व सूत्रों से हुआ। इन सूत्रों में यज्ञ वेदियाँ बनाने की विधियाँ दी जाती थीं। इस देश में प्राचीन समय में यज्ञ दो प्रकार के हुआ करते थे-नित्य अथवा विवशक, और काम्य अथवा ऐच्छिक। नित्य यज्ञ प्रत्येक हिन्दू को करने ही पड़ते थे। उनका न करना पाप समझा जाता था। काम्य यज्ञ किसी विशेष हेतु से किये जाते थे। पुत्र की प्राप्ति के लिए पुत्रेष्टि यज्ञ किया जाता था। इसी प्रकार रोगों से बचने के लिए अथवा व्यापारिक सफलता के लिए विशेष प्रकार के यज्ञ करने होते थे। इनका करना न करना व्यक्ति की इच्छा पर निर्भर था।

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BRIJ MOHAN

BRIJ MOHAN ब्रजमोहन गणितज्ञ होते हुए भी हिन्दी भाषा और उसके व्याकरण के विकास में सक्रिय योगदान के लिए समादृत विद्वान। स्कूली शिक्षा मुरादाबाद (उ.प्र.) में। एम.ए., एलएल.बी. करने के बाद सन् 1934 में इंगलैंड से पीएच.डी. की उपाधि। तत्पश्चात काशी हिंदू विश्वविद्यालय में प्राध्यापक के रूप में नियुक्ति। वहीं, हिन्दी भाषा और व्याकरण पर कार्य करने का संकल्प और उसे पूरा करने की दिशा में लगातार अध्यवसाय। हिन्दी की विशिष्ट सेवा के लिए उत्तर प्रदेश राजकीय पुरस्कार से सम्मानित। सेंट्रल हिंदू कॉलेज, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में गणित विभाग के अध्यक्ष और फिर प्राचार्य रहे। वर्ष 1990 में देहावसान। प्रमुख प्रकाशित कृतियाँ : गणितीय कोश, गणित का इतिहास, अर्थ-विज्ञान, अवकलन गणित, मायावर्ग, चिह्न विज्ञान : उत्पादन और सांस्कृतिक संदर्भ, हिन्दी की प्रकृति और शुद्ध प्रयोग, विशेषण प्रयोग, किस्सा : एक से एक, भाषा और व्यवहार, सरल गणित-ज्यामिति, शुद्ध गणित की पाठचर्चा, रूपान्तर कलन, अंग्रेज़ी-हिन्दी वैज्ञानिक कोश (खंड : 1-2), नागरी लिपि : रूप और सुधार, शब्द-चर्चा, मानक हिन्दी आदि।

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