Suddh Ganit Ki Pathcharcha

Format:Hard Bound

ISBN:81-8143-174-X

Author:BRIJ MOHAN

Pages:462


MRP : Rs. 1250/-

Stock:In Stock

Rs. 1250/-

Details

प्रस्तुत खंड में अवकलन और समाकलन गणित के कुछ अतिरिक्त प्रमेय, अनन्त श्रेणियों और अनन्त समाकलों का अभिसरण, वास्तविक चर के लघुगणकी, घातांकी और वृत्तीय फलनों का सार्व सिद्धान्त आदि दिये गये हैं। हिन्दी माध्यम से अध्ययन करने वाले छात्रों के लिए काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के गणित विभाग के भूतपूर्व अध्यक्ष एवं यशस्वी प्राध्यापक डॉ. ब्रजमोहन ने हार्डी की इस कृति का अविकल अनुवाद हिन्दी में करके छात्रों का बहुत बड़ा हित किया है।

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About the writer

BRIJ MOHAN

BRIJ MOHAN ब्रजमोहन गणितज्ञ होते हुए भी हिन्दी भाषा और उसके व्याकरण के विकास में सक्रिय योगदान के लिए समादृत विद्वान। स्कूली शिक्षा मुरादाबाद (उ.प्र.) में। एम.ए., एलएल.बी. करने के बाद सन् 1934 में इंगलैंड से पीएच.डी. की उपाधि। तत्पश्चात काशी हिंदू विश्वविद्यालय में प्राध्यापक के रूप में नियुक्ति। वहीं, हिन्दी भाषा और व्याकरण पर कार्य करने का संकल्प और उसे पूरा करने की दिशा में लगातार अध्यवसाय। हिन्दी की विशिष्ट सेवा के लिए उत्तर प्रदेश राजकीय पुरस्कार से सम्मानित। सेंट्रल हिंदू कॉलेज, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में गणित विभाग के अध्यक्ष और फिर प्राचार्य रहे। वर्ष 1990 में देहावसान। प्रमुख प्रकाशित कृतियाँ : गणितीय कोश, गणित का इतिहास, अर्थ-विज्ञान, अवकलन गणित, मायावर्ग, चिह्न विज्ञान : उत्पादन और सांस्कृतिक संदर्भ, हिन्दी की प्रकृति और शुद्ध प्रयोग, विशेषण प्रयोग, किस्सा : एक से एक, भाषा और व्यवहार, सरल गणित-ज्यामिति, शुद्ध गणित की पाठचर्चा, रूपान्तर कलन, अंग्रेज़ी-हिन्दी वैज्ञानिक कोश (खंड : 1-2), नागरी लिपि : रूप और सुधार, शब्द-चर्चा, मानक हिन्दी आदि।

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