Aadevasi Swar : Vachik Parampara Ve Sahitiya

Format:Hard Bound

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Pages:196


MRP : Rs. 250/-

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Rs. 250/-

Details

‘वाचिक परम्परा व साहित्य’ आदिवासी स्वर पुस्तक माला का दूसरा खण्ड है। यह महत्त्वपूर्ण खण्ड आदिवासी जनजाति संतालों के संघर्ष का प्रस्थान-बिन्दु है। संयोग ही है कि हाल ही में ‘हूल’ या ‘संताल विद्रोह’ की 150वीं वर्षगाँठ मनायी गयी है। यह पुस्तक सदियों से जल-जंगल-जमीन और अपनी स्वतन्त्र अस्मिता की तलाश में संघर्षरत विभिन्न आदिवासी समुदायों की गाथा प्रस्तुत करने का प्रयास है। पुस्तक के इस खण्ड में देश के विभिन्न भागों में बसने-घूमने वाले आदिवासी समुदायों की वाचिक परम्परा और साहित्य का अध्ययन किया गया है। इसके अन्तर्गत आदिवासियों के साहित्य, उनकी संस्कृति, लोककथाओं, लोकगीतों पर सुमान्य लेखकों ने दृष्टिपात किया है।

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