Aalochnana Ka Aadhunik Bodh

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5072-565-8

Author:DR. RAMDARASH MISHRA

Pages:304


MRP : Rs. 595/-

Stock:In Stock

Rs. 595/-

Details

आलोचना का आधुनिक बोध

Additional Information

प्रस्तुत पुस्तक रामदरश मिश्र के विशिष्ट समीक्षात्मक निबन्धों का संकलन है। मिश्र जी अपने को प्रमुखतः सर्जक मानते हैं किन्तु आलोचना के क्षेत्र में भी उनकी उपस्थिति कम महत्त्वपूर्ण नहीं है। उन्होंने नाटक के अतिरिक्त साहित्य की सभी प्रमुख विधाओं की समीक्षा-यात्रा की है तथा उनके विविध पड़ावों, प्रवृत्तियों, रचनाकारों और रचनाओं की गहरी पहचान की है। इस संकलन में कुछ सिद्धान्तपरक निबन्ध भी हैं किन्तु व्याख्यात्मक समीक्षापरक निबन्धों की ही प्रधानता है। आधुनिक चेतना से सम्पन्न मिश्र जी प्रगतिवादी दृष्टि के रचनाकार और आलोचक हैं। आधुनिक काल का साहित्य उनके अध्ययन का मुख्य क्षेत्र रहा है किन्तु इस संकलन में विद्यापति, कबीर की कविताओं तथा ‘रामचरित मानस’ से सम्बन्धित समीक्षात्मक निबन्ध भी हैं। मिश्र जी सामाजिक यथार्थ और परिवेशगत जीवन के रचनाकार हैं अतः उनकी समीक्षा-दृष्टि उन रचनाओं को विशेष महत्त्व प्रदान करती है जिनमें अपने परिवेश और समाज का जीवन बोलता है। इन निबन्धों में उनकी यह दृष्टि देखी जा सकती है। मिश्र जी समीक्ष्य रचनाओं पर अपने को आरोपित नहीं करते, बल्कि उनके भीतर पैठ कर, उनकी अपनी वस्तुगत और कलागत छवियों की पहचान करते हैं।

About the writer

DR. RAMDARASH MISHRA

DR. RAMDARASH MISHRA रामदरश मिश्र का जन्म 15 अगस्त, 1924 को गोरखपुर जिले के डुमरी गाँव में हुआ। इनके काव्य हैं - पथ के गीत, बैरंग-बेनाम चिट्ठियाँ, पक गई है धूप, कन्धे पर सूरज, दिन एक नदी बन गया, मेरे प्रिय गीत, बाजार को निकले हैं लोग, जुलूस कहाँ जा रहा है?, रामदरश मिश्र की प्रतिनिधि कविताएँ, आग कुछ नहीं बोलती, शब्द सेतु, बारिश में भीगते बच्चे, हँसी ओठ पर आँखें नम हैं (ग़ज़ल), ऐसे में जब कभी, आम के पत्ते, तू ही बता ऐ ज़िन्दगी, हवाएँ साथ हैं, कभी-कभी इन दिनों, धूप के टुकड़े, आग की हँसी। इनके उपन्यास हैं - पानी के प्राचीर, जल टूटता हुआ, सूखता हुआ तालाब, अपने लोग, रात का सफर, आकाश की छत, आदिम राग, बिना दरवाजे का मकान, दूसरा घर, थकी हुई सुबह, बीस बरस, परिवार, बचपन भास्कर का। इनके कहानी संग्रह हैं - खाली घर, एक वह, दिनचर्या, सर्पदंश, बसन्त का एक दिन, इकसठ कहानियाँ, मेरी प्रिय कहानियाँ, अपने लिए, चर्चित कहानियाँ, श्रेष्ठ आंचलिक कहानियाँ, आज का दिन भी, एक कहानी लगातार, फिर कब आएँगे?, अकेला मकान, विदूषक, दिन के साथ, मेरी कथा-यात्रा। इनके ललित निबन्ध हैं - कितने बजे हैं, बबूल और कैक्टस, घर परिवेश, छोटे-छोटे सुख। इनकी आत्मकथाएँ हैं - सहचर है समय, फुरसत के दिन। इनका यात्रावृत्त है - घर से घर तक देश यात्रा। इनकी डायरी हैं - आते-जाते दिन, आस-पास, बाहर-भीतर। 11 पुस्तकों पर समीक्षा लिखी है और 14 खंडों में इनकी रचनावली प्रकाशित हो चुकी है।

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