PAANCH BEHATREEN KAHANIYAN

Format:Paper Back

ISBN:978-93-5072-457-6

Author:AKHILESH

Pages:152

MRP:Rs.75/-

Stock:In Stock

Rs.75/-

Details

"हम लोग लड़कियों के दीवाने थे। कोई हमारी आन्तरिक बातें सुनता तो हमें लम्पट और लुच्चा मान लेता। मगर हम ऐसे गिरे हुए नहीं थे। ...सच कहूँ, हम इतने नैतिक थे कि अवसर को ठुकरा देते थे। वैसे तो हम लोगों की तरफ़ अनेक लड़कियाँ लपकती थीं। हम अपने-अपने विभाग के हीरो थे। यह भी बता दूँ कि चिकने-चुपड़े गालों, सफाचट मूँछों और दौलत की वजह से हीरो नहीं थे; बल्कि हममें से अधिसंख्य तो दाढ़ी भी रखते थे। जहाँ तक दौलत का प्रश्न है, तो हम लड़कियों से प्रायः चन्दा माँगते थे।"

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About the writer

AKHILESH

AKHILESH जन्म : 1960, सुल्तानपुर (उ.प्र.)। शिक्षा : एम.ए. (हिन्दी साहित्य), इलाहाबाद विश्वविद्यालय। प्रकाशित कृतियाँ—कहानी-संग्रह : आदमी नहीं टूटता, मुक्ति, शापग्रस्त, अँधेरा। उपन्यास : अन्वेषण। सृजनात्मक गद्य : वह जो यथार्थ था। आलोचना : श्रीलाल शुक्ल की दुनिया (सं.)। सम्पादन : वर्तमान साहित्य, अतएव पत्रिकाओं में समय-समय पर सम्पादन। आजकल प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिका तद्भव के सम्पादक। 'एक कहानी एक किताब' शृंखला की दस पुस्तकों के शृंखला सम्पादक। 'दस बेमिसाल प्रेम कहानियाँ' का सम्पादन। अन्य : देश के महत्त्वपूर्ण निर्देशकों द्वारा कई कहानियों का मंचन एवं नाट्य रूपान्तरण। कुछ कहानियों का दूरदर्शन हेतु फिल्मांकन। टेलिविजन के लिए पटकथा एवं संवाद लेखन। अनेक भारतीय भाषाओं में रचनाओं के अनुवाद प्रकाशित। पुरस्कार/सम्मान : श्रीकांत वर्मा सम्मान, इन्दु शर्मा कथा सम्मान, परिमल सम्मान, वनमाली सम्मान, अयोध्या प्रसाद खत्री सम्मान, स्पन्दन पुरस्कार, बाल कृष्ण शर्मा नवीन पुरस्कार, कथा अवार्ड।

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