PINDDAAN

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ISBN:978-93-5000-820-1

Author:DR. JASVINDER KAUR BINDRA

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MRP : Rs. 175/-

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पिण्डदान मात्रा एक धार्मिक कर्मकाण्ड नहीं अपितु पितरों के प्रति आदर, निष्ठा, सम्मान, आस्था, प्रेम, श्रद्धा, ममता एवं समर्पण का प्रतीक है। वर्तमान का भूत को आदर, प्रेम तथा श्रद्धापूर्ण ऋण अदायगी का एक प्रतीकात्मक धार्मिक कृत्य जिसका अधिकार पुरुष को है। बद्रीधाम तीर्थ की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित इस संग्रह की शीर्ष कथा ‘पिण्डदान’ जहाँ एक ओर इस महत्वपूर्ण पुरुष प्रधान धार्मिक अनुष्ठान में एक स्त्री के दायित्व, उसकी भूमिका तथा अधिकार की विवेचना करती है वहीं एक संस्कृति से भी परिचित कराती है।

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About the writer

DR. JASVINDER KAUR BINDRA

DR. JASVINDER KAUR BINDRA शिक्षा : एम.ए., पी-एच.डी. (दिल्ली विश्‍वविद्यालय, दिल्ली)। आलोचना : वारतककार गुरबख्श सिंह प्रीतलड़ी मनोविज्ञान अते पंजाबी कहानी, हिंदी-पंजाबी पत्र-पत्रिकाओं में अनेक समीक्षात्मक लेख व निबंध तथा विभिन्न पुस्तकें प्रकाशित। अनुवाद : बच्चों की अनेक पुस्तकों के साथ-साथ हिंदी-पंजाबी में करीब 35 पुस्तकों का अनुवाद। डॉ. धर्मवीर भारती, कमलेश्‍वर, प्रेमचंद, चित्रा मुद‍्गल सहित अनेक वरिष्‍ठ साहित्यिकों की कृतियों का अनुवाद ने.बु.ट्र., साहित्य अकादेमी, भारतीय ज्ञानपीठ, प्रभात प्रकाशन, वाणी प्रकाशन, पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला, आलेख प्रकाशन इत्यादि से प्रकाशित। अन्य मौलिक पुस्तकें : स्कूली शिक्षा के लिए अनेक पंजाबी रीडर्स (कक्षा एक से पाँचवीं तक), ‘एक पंथ दो काज’ (भारतीय प्रौढ़ शिक्षा संघ), ‘छुट्टी न भई न’ तथा ‘मिलकर खेलें’ (ने.बु.ट्र.) हिंदी में। सम्मान : पंजाबी अकादमी, दिल्ली से अनुवाद पुरस्कार (2006)।

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